Major crops
Major crops · cropping patterns · cropping seasons
12 मिनट में पढ़ें · अपडेट किया गया 2026-06-02
त्वरित उत्तर
भारत में तीन फसल ऋतुएँ हैं — खरीफ, जो जून में मानसून के साथ बोई जाती है और अक्टूबर तक कटती है (धान, मक्का, कपास, सोयाबीन, मूँगफली); रबी, जो नवंबर में शेष नमी और सिंचाई पर बोई जाकर मार्च तक कटती है (गेहूँ, चना, सरसों); तथा ज़ायद, मार्च से मई तक की छोटी सिंचित ग्रीष्म फसल। 2023-24 में खाद्यान्न उत्पादन 332.3 मिलियन टन रहा।
कहानी
3 जुलाई 2024 को नई दिल्ली के कृषि भवन ने 2023-24 का चौथा अग्रिम अनुमान जारी किया। यह आँकड़ा एक रिकॉर्ड था: 332.3 मिलियन टन खाद्यान्न — चावल 137.8 mt, गेहूँ 113.3 mt, मोटे अनाज 57.3 mt, दालें 24.5 mt। गन्ना 453 mt। कपास 32.5 मिलियन गाँठें (170 kg प्रत्येक)। बागवानी 352 mt। उसी मेज पर एक और रिपोर्ट पड़ी थी: पंजाब के मध्यवर्ती जिलों में भूजल स्तर में गिरावट की गति 51 सेमी प्रतिवर्ष तक पहुँच गई है; 2024 में खरीफ धान का क्षेत्रफल 31.9 लाख हेक्टेयर था — जो 2010 से लगभग अपरिवर्तित रहा है।
यह एक विरोधाभास है: भारत पहले से कहीं अधिक खाद्यान्न उगा रहा है, फिर भी फसल पद्धति में बदलाव नहीं आया। चावल + गेहूँ सिंचित खाद्यान्न क्षेत्र के लगभग 75% पर काबिज हैं। दालें + तिलहन सकल फसली क्षेत्र के मात्र 16-18% पर हैं, जबकि खाद्य तेलों के आयात पर अकेले ₹1.5 लाख करोड़ खर्च हो रहे हैं। इसी बीच, भारत ने पहला अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष (2023, UN) मनाया और 'श्री अन्न' ब्रांड लॉन्च किया — लेकिन मोटे अनाज का क्षेत्रफल **12 mha** पर लगभग स्थिर रहा।
UPSC की दृष्टि से, फसल कैलेंडर कृषि से जुड़े हर प्रश्न की रीढ़ है — Prelims के खरीफ बनाम रबी MCQ से लेकर Mains के फसल विविधीकरण पर निबंध तक।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
GS-III में नियमित रूप से फसल पद्धति के विविधीकरण, चावल-गेहूँ एकल-फसल प्रणाली की अस्थिरता और विशेष फसलों की उत्पादन प्रवृत्ति पर प्रश्न पूछे जाते हैं। Prelims में 2022, 2020, 2018, 2016, 2013, 2010 — प्रत्येक चक्र में खरीफ/रबी फसल पहचान, शीर्ष उत्पादक राज्य और फसल-जल आवश्यकता से संबंधित कम से कम एक MCQ आया है।