Poverty & hunger
Poverty & hunger · multidimensional poverty · HDI
12 मिनट में पढ़ें · अपडेट किया गया 2026-06-02
त्वरित उत्तर
गरीबी भोजन, आवास, वस्त्र, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी न कर पाने की स्थिति है, जिसे या तो आय-आधारित रेखा से या बहुआयामी वंचना से मापा जाता है। भारत की अंतिम आधिकारिक रेखा — तेंदुलकर आकलन — के अनुसार 2011-12 में 21.9 प्रतिशत लोग गरीब थे; नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक में 2022-23 में यह 11.28 प्रतिशत रह गई, जो 2013-14 में 29.17 प्रतिशत थी।
कहानी
17 जुलाई 2023 का दिन था। Niti Aayog ने National Multidimensional Poverty Index (MPI) 2023 Report जारी की। सुर्खियों में था: 2013-14 से 2022-23 के बीच 24.82 करोड़ भारतीय बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले। राष्ट्रीय MPI 29.17% से घटकर 11.28% हो गया। Bihar का MPI सर्वाधिक गिरा (51.89% से 26.59% तक) — पर निरपेक्ष स्तर अभी भी सबसे ऊंचा। UP, Bihar, MP, Rajasthan, Jharkhand MPI गरीबों का 65% हिस्सा हैं।
लेकिन उसी वर्ष Oxfam India की "Survival of the Richest" रिपोर्ट ने उजागर किया: भारत का शीर्ष 1% राष्ट्रीय संपत्ति का 40.5% रखता है; निचला 50% केवल 3% का मालिक है। World Bank के अनुसार 12.9 करोड़ भारतीय अभी भी $2.15/दिन (चरम गरीबी रेखा) से नीचे जीते हैं। State of Working India 2023 रिपोर्ट (Azim Premji University) बताती है कि 63% पुरुष कर्मी + 87% महिला कर्मी ₹10,000/माह से कम कमाते हैं।
भारत में गरीबी एक विवादित क्षेत्र है — क्या मापें (आय बनाम बहुआयामी?), कैसे मापें (उपभोग बनाम संपत्ति?), किस सीमा पर (Tendulkar बनाम Rangarajan बनाम वैश्विक $2.15?)। यह अध्ययन-सामग्री सब कुछ समेटती है: उन धूल-भरे भारतीय गांवों से जहाँ 80% गरीब रहते हैं, लेकर केंद्रीय आर्थिक + सामाजिक परिवर्तनों तक।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
UPSC के लिए:
- Prelims: Tendulkar Committee 2009, Rangarajan Committee 2014, Suresh Tendulkar गरीबी रेखा, MPI पद्धति, BPL सर्वेक्षण, PMAY, MGNREGA, NSAP, PDS।
- Mains GS-I + GS-II + GS-III: गरीबी का मापन, कमजोर वर्ग, कल्याण योजनाएं, समावेशी विकास, असमानता।
- Interview: UBI + नकद हस्तांतरण + MGNREGA पर व्यक्तिगत मत।