Social empowerment
Social empowerment — SC, ST, OBC, EWS reservation
कहानी से शुरुआत
7 नवम्बर 2022 का दिन था। सर्वोच्च न्यायालय की पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ — CJI U.U. Lalit के साथ न्यायमूर्तिगण Dinesh Maheshwari, Bela Trivedi, Ravindra Bhat और J.B. Pardiwala — ने Janhit Abhiyan बनाम भारत संघ में अपना ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। 3-2 के बहुमत से पीठ ने 103वें संविधान संशोधन 2019 को बरकरार रखा, जिसने सामान्य श्रेणी में "आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों" (EWS) के लिए शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण की व्यवस्था की थी।
यह निर्णय संवैधानिक दृष्टि से भूकम्प जैसा था, क्योंकि इसके तीन असाधारण निहितार्थ थे:
इसने अकेले आर्थिक मानदण्ड को आरक्षण का वैध आधार माना — जिससे वह 70 वर्षीय सिद्धान्त उलट गया कि भारत में आरक्षण केवल जाति / जनजाति उत्पीड़न से उपजी सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ेपन के लिए है।
इसने Indra Sawhney की 50% सीमा का उल्लंघन स्वीकार किया — 1992 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लगायी गयी वह सीमा जो आरक्षण को 50% से अधिक नहीं जाने देती थी। EWS का 10% जुड़ने से अब कुल = 15% SC + 7.5% ST + 27% OBC + 10% EWS = 59.5% हो गया।
SC/ST/OBC को EWS से बाहर रखा गया — एक गरीब दलित या आदिवासी EWS का दावा नहीं कर सकता, भले ही वह किसी गरीब सवर्ण आवेदक से अधिक आर्थिक रूप से विपन्न हो। न्यायमूर्ति Bhat ने अपने असहमति मत में इसे "वंचितों को बाहर करना" और "संवैधानिक नैतिकता के साथ विश्वासघात" कहा।
EWS निर्णय भारतीय आरक्षण राजनीति के उथल-पुथल भरे एक दशक की परिणति था — Maratha आरक्षण को 2021 में निरस्त किया गया, Patidar आन्दोलन 2015-17, Jat आन्दोलन 2016, OBC उप-वर्गीकरण के लिए Rohini Commission (2017+ जारी), 102वाँ + 105वाँ संशोधन NCBC + राज्य सूचियों पर, और मँडराती जाति जनगणना बहस (Bihar 2023, राष्ट्रीय स्तर पर 2027 की सम्भावना)। यह अध्ययन-सामग्री इन सबका समग्र मानचित्र प्रस्तुत करती है।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
Mains GS-I + GS-II — इस विषय पर पूछा गया है: 2014: "भारतीय समाज बहु-जातीय, बहु-भाषीय एवं बहु-सांस्कृतिक है। इससे उत्पन्न चुनौतियाँ एवं अवसर क्या हैं?"; 2017: "नगरों का विकास पर्याप्त अधोसंरचना के साथ नहीं हुआ"; 2018: "जाति-आधारित हिंसा भारत में गम्भीर चिन्ता का विषय है"; 2020: "14वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं ने राज्यों की राजकोषीय स्थिति सुधारने में किस प्रकार सहायता की?" आरक्षण का उप-विषय "भारतीय समाज की विशेषताएँ" और "कल्याणकारी योजनाएँ" के अन्तर्गत बार-बार पूछा जाता है।
Prelims में परीक्षित किया गया है:
- संविधान के अनुच्छेद (15, 16, 46, 330, 332, 335, 341, 342)।
- संशोधन संख्याएँ (77वाँ, 81वाँ, 85वाँ, 93वाँ, 102वाँ, 103वाँ, 105वाँ)।
- NCBC की संरचना (102वाँ संशोधन 2018, Article 338B)।
- EWS (103वाँ 2019)।
- Indra Sawhney की 50% सीमा।
Interview: जाति जनगणना, उप-वर्गीकरण, EWS की आलोचना, दो-बच्चा मानदण्ड बनाम आरक्षण, क्रीमी लेयर, Maratha आरक्षण।
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