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Practice — past 10 years UPSC essay topics

12 मिनट में पढ़ें · अपडेट किया गया 2026-06-02

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त्वरित उत्तर

UPSC निबंध प्रश्नपत्र के पिछले विषय ही निबंध-अभ्यास का केंद्र हैं: 2008 से 2024 के बीच पूछे गए 156 विषय नौ परिवारों में बँटते हैं — दार्शनिक अमूर्तन, जेंडर, शिक्षा, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी तथा समाज, मूल्य, भारत और विश्व, संघवाद, तथा व्यापक अर्थव्यवस्था-समाज — जिनमें दार्शनिक अमूर्तन सबसे बड़ा परिवार है, 24 विषयों के साथ।

कहानी

फरवरी 2018 की बात है। हैदराबाद की एक अभ्यर्थी एक Excel स्प्रेडशीट खोलती है — अगले आठ महीनों तक यही उसकी दुनिया रहेगी। Column A: वर्ष (2008-2017)। Column B: Section A का विषय। Column C: Section B का विषय। Column D: उसका हस्तलिखित निबंध। Column E: मेंटर के अंक (250 में से)। Column F: क्या गड़बड़ हुई। फरवरी के अंत तक उसके सामने पिछले दस वर्षों के 80 निबंध-विषय बिछे हुए हैं। अप्रैल के अंत तक वह उनमें से 25 लिख चुकी है — सभी समयबद्ध, सभी परीक्षा-हॉल जैसी परिस्थितियों में। जून के अंत तक उसके मेंटर ने हर निबंध को दो बार जाँचा है — एक बार संरचना के लिए, एक बार विषय-वस्तु के लिए। अगस्त के अंत तक उसका औसत निबंध-अंक 92 से बढ़कर 144 हो चुका है। Mains 2018 में उसका अंतिम निबंध-अंक: 152।

यह 152 अचानक आई गद्य-प्रतिभा का चमत्कार नहीं था। यह परीक्षा-पत्र से पहले निबंध-पत्र को पचीस बार लिखने का परिणाम था। विगत वर्षों के विषय कोई स्थिर सूची नहीं हैं जिन्हें रटा जाए। वे वास्तविक परीक्षा के सबसे निकट का अभ्यास-माध्यम हैं। वही विषय दोबारा नहीं आते — किंतु उनके नीचे छिपे पैटर्न हर वर्ष दोहराते हैं, और ये पैटर्न बीस या अधिक निबंध लिखने के बाद ही दिखाई देते हैं।

यह इकाई UPSC के पिछले 10 वर्षों के निबंध-विषयों को एक सूची से अभ्यास-पाठ्यक्रम में बदलने के बारे में है — संरचित, अनुक्रमित और मूल्यांकित।

UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

निबंध-पत्र 250 अंकों का होता है — एक GS प्रश्नपत्र के बराबर। शीर्ष स्कोरर (140-160) लगातार यह बताते हैं कि उन्होंने Mains से पहले के एक वर्ष में 20-30 निबंध लिखे। औसत स्कोरर (100-120) कहते हैं कि उन्होंने 5-8 निबंध लिखे। यह 40 अंकों का अंतर अभ्यास की मात्रा से गहरा सहसंबंध रखता है। UPSC ने 2008 से 2024 के बीच 16 प्रश्नपत्रों में 156 निबंध-विषय पूछे हैं (प्रति वर्ष 8 विषय × 16 वर्ष, कुछ वर्षों में 10 विषय)। विषय-समूहों की पुनरावृत्ति चकित करने वाली है: दार्शनिक अमूर्त विचार (24 विषय), लैंगिक मुद्दे (12), शिक्षा (11), पर्यावरण-अर्थव्यवस्था (10), प्रौद्योगिकी (8), भारत और विश्व (8), मूल्य (9), अर्थव्यवस्था और समाज (10), संघवाद और लोकतंत्र (8)। जो अभ्यर्थी प्रत्येक समूह से एक-एक विषय पर अभ्यास कर चुका है, उसने वास्तव में 2026 के संभावित हर विषय को पहले से तैयार कर लिया है।