Persons with Disabilities
Persons with Disabilities — RPwD Act 2016, accessible India
कहानी से शुरुआत
30 मार्च 2007 का दिन था। भारत ने न्यूयॉर्क में United Nations Convention on the Rights of Persons with Disabilities (UNCRPD) पर हस्ताक्षर किए। 1 अक्टूबर 2007 तक भारत ने इसे अनुमोदित (ratify) कर दिया — यह उन सबसे आरंभिक हस्ताक्षरकर्ताओं में था। इस सम्मेलन ने एक आमूल बदलाव की मांग की: विकलांगता अब किसी व्यक्ति की चिकित्सीय समस्या नहीं रही; यह एक सामाजिक निर्माण (social construct) है — जो दुर्गम इमारतों, प्रतिकूल मनोवृत्तियों और अपवर्जित (excluding) संस्थाओं द्वारा खड़ी की गई है।
नौ वर्षों तक भारत का 1995 का Persons with Disabilities Act, UNCRPD के साथ अंतर्विरोध में खड़ा रहा। उसमें केवल सात विकलांगताओं को मान्यता दी गई थी। उसमें "handicapped" शब्द का प्रयोग होता था। वह विकलांगता को दान-दया के रूप में देखता था।
फिर 27 दिसंबर 2016 को संसद ने Rights of Persons with Disabilities (RPwD) Act पारित किया। इस नए अधिनियम ने सूची को 21 विकलांगताओं तक विस्तारित किया, सरकारी नौकरियों में 4% आरक्षण (3% से बढ़ाकर), उच्च शिक्षा में 5% आरक्षण, और एक National Fund को अनिवार्य किया। इसने कानूनी क्षमता, सुलभ सूचना, समावेशी शिक्षा की गारंटी दी और भेदभाव को अपराध घोषित करते हुए 5 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान किया।
आज ~2.68 करोड़ भारतीय (जनगणना 2011) — WHO के अनुमान के अनुसार संभवतः 8-10 करोड़ (जनसंख्या का 15-17%) — उन 21 विकलांगताओं में से एक या अधिक के साथ जीते हैं। 2016 का अधिनियम, 3 दिसंबर 2015 को शुरू किए गए Accessible India Campaign (Sugamya Bharat Abhiyan) के साथ मिलकर, भारत की विकलांगता अधिकार संरचना की वैधानिक और कार्यक्रमात्मक रीढ़ है।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह GS-II सामाजिक न्याय का एक केंद्रीय खंड है। प्रारंभिक परीक्षा: 21 विकलांगताओं, आरक्षण प्रतिशत, UNCRPD अनुसमर्थन के वर्ष, और Accessible India Campaign की तिथि पर प्रश्न पूछे जाते हैं (2017, 2019, 2022 की प्रारंभिक परीक्षाओं में पूछे गए)। मुख्य परीक्षा: हर 2-3 वर्षों में प्रश्न आता है — "PwDs के लिए कानूनी ढांचे की विवेचना करें" (2017), "विकलांग बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा की जांच करें" (2020), "अधिकार-आधारित बनाम कल्याण-आधारित दृष्टिकोण" (2024)। साक्षात्कार: विकलांगता के प्रति मनोवृत्ति और नीति-निर्माण पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
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