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सामाजिक न्यायप्रारंभिक: मध्यममुख्य परीक्षा: उच्चसाक्षात्कार: उच्च12 मिनट में पढ़ेंअपडेट किया गया 2026-06-02

Maternal & child health

Maternal & child health — NHM, JSY, POSHAN Abhiyaan

कहानी से शुरुआत

सितंबर 2017 का महीना है। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के एक छोटे से गाँव में मंजू देवी, एक 24 वर्षीया माँ, अपने तीसरे बच्चे को जन्म देने वाली है। उसके पहले दो बच्चे घर पर ही दाई की सहायता से पैदा हुए थे। पहला बच्चा जन्म श्वासावरोध (birth asphyxia) से मर गया। दूसरा बच्चा अवरुद्ध विकास (stunted) का शिकार है — 5 साल की उम्र में उसकी ऊँचाई 102 cm है, जबकि WHO का मध्यमान 112 cm है। मंजू खुद 9 महीने की गर्भावस्था में मात्र 41 kg की है — खून की कमी से पीड़ित, कम वजन वाली, और गर्भकालीन मधुमेह (gestational diabetes) की कभी जाँच नहीं हुई।

इस बार उसकी ASHA कार्यकर्ता ममता उसे बहराइच CHC (Community Health Centre) में प्रसव कराने के लिए मना लेती है। मंजू को 1,400 रुपये JSY नकद प्रोत्साहन मिलता है, Janani Shishu Suraksha Karyakram (JSSK) के तहत मुफ्त परिवहन, आयरन-फोलिक एसिड की गोलियाँ, टेटनस का टीका और चार प्रसव-पूर्व जाँचें (antenatal visits) मिलती हैं। एक प्रशिक्षित प्रसव सहायक बच्चे को जन्म देता है। ASHA जन्म दर्ज करती है, POSHAN Tracker ऐप पर बच्चे का पंजीकरण करती है, और HBNC (Home-Based Newborn Care) के तहत घर पर छह प्रसवोत्तर संपर्क (post-natal contacts) के लिए आती है।

मंजू का तीसरा बच्चा — जिसे हम रिया कहते हैं — पहला बच्चा है जो न अवरुद्ध विकास (stunted) का शिकार है, न कुपोषित (wasted), न जन्म श्वासावरोध के जोखिम में है।

यह यात्रा — घर पर दाई → ASHA और JSY के साथ CHC → Anganwadi और POSHAN Tracker — यही 2005 से भारत के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के परिवर्तन की कहानी है। इसका परिणाम: MMR 437 (1990) से घटकर 97 (NSO 2018-20); IMR 80 (1990) से घटकर 28 (SRS 2022); U5MR 126 (1990) से घटकर 32 (SRS 2022)

लेकिन भारत पर अभी भी मातृ एवं शिशु मृत्युदर तथा अवरुद्ध विकास का सबसे अधिक निरपेक्ष बोझ (absolute burden) है। NFHS-5 (2019-21) के अनुसार पाँच वर्ष से कम आयु के 35.5% बच्चे stunted हैं; 15-49 आयु वर्ग की 57% महिलाएँ खून की कमी (anaemic) से ग्रस्त हैं; ~24,000 महिलाएँ प्रतिवर्ष प्रसव के दौरान मर जाती हैं। यह इकाई NHM + JSY + JSSK + RBSK + RKSK + POSHAN Abhiyaan को समेटती है जिन्होंने इस ढाँचे को खड़ा किया — और जहाँ अभी भी रिसाव है।

UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह GS-II का एक बार-बार परीक्षित विषय है। Prelims: NFHS-5 संकेतक, POSHAN Abhiyaan के लक्ष्य, ICDS के घटक, RBSK के 4 D, JSY/JSSK के प्रावधान (2017, 2019, 2021, 2023, 2024 में पूछे गए)। Mains: लगभग हर साल आता है — "पोषण संबंधी चुनौतियाँ" (2019), "POSHAN Abhiyaan का मूल्यांकन" (2023), "MMR + IMR की प्रगति" (2022)। Interview: stunting और anaemia पर अत्यधिक पूछताछ होती है।

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