Health policy
Health policy — NHP 2017, Ayushman Bharat, PMJAY, HWCs
त्वरित उत्तर
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 भारत का स्वास्थ्य ढाँचा है, जो सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और 2025 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को सकल घरेलू उत्पाद के 2.5 प्रतिशत तक ले जाने का संकल्प लेती है, जबकि 2021-22 में भी जेब से होने वाला खर्च कुल स्वास्थ्य व्यय का लगभग 47 प्रतिशत था। इसे आयुष्मान भारत के चार स्तंभ लागू करते हैं: स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र, PM-JAY, डिजिटल मिशन और PM-ABHIM।
कहानी से शुरुआत
23 सितंबर 2018 की बात है। प्रधानमंत्री ने रांची, झारखंड से Ayushman Bharat — Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana (PMJAY) का शुभारंभ किया। मंच से उन्होंने इसे "विश्व की सबसे बड़ी सरकारी वित्त-पोषित स्वास्थ्य बीमा योजना" की संज्ञा दी। इस योजना के अंतर्गत 10.74 करोड़ सबसे गरीब परिवारों (~50 करोड़ लाभार्थियों) को द्वितीयक और तृतीयक अस्पताल उपचार के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख की कवरेज मिलेगी — नकदरहित (cashless), राज्यों में पोर्टेबल, कागजरहित (paperless)।
इससे पाँच महीने पहले, 14 अप्रैल 2018 को, सरकार ने Ayushman Bharat का दूसरा स्तंभ — Health and Wellness Centres (HWCs) — छत्तीसगढ़ के नक्सल-प्रभावित जिले में जांगला से प्रारंभ किया था। उद्देश्य था: 1.5 लाख उप-केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) को HWCs में रूपांतरित कर उन्हें Comprehensive Primary Healthcare (CPHC) यानी संपूर्ण प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल से लैस करना — जिसमें गैर-संचारी रोगों (NCDs) की स्क्रीनिंग, उपशामक देखभाल (palliative care), मानसिक स्वास्थ्य, वृद्धावस्था और किशोर-स्वास्थ्य सेवाएँ भी शामिल हों।
ये दोनों स्तंभ — प्राथमिक देखभाल (HWC) + वित्तीय सुरक्षा (PMJAY) — National Health Policy 2017 की वास्तुकला पर टिके हैं, जिसने भारत का स्वास्थ्य-दृष्टिकोण निर्धारित किया: बिना किसी वित्तीय कठिनाई के सभी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुँच। NHP 2017 ने 2025 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को GDP का 2.5% करने (2024-25 में अभी भी ~2.1%) और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता जताई।
यह इकाई भारत के उस क्रमिक विकास की कहानी है — औपनिवेशिक काल के Bhore Committee 1946 → Health Survey 1961 → NHP 1983 → NHP 2002 → NHP 2017 → Ayushman Bharat 2018 → PM-ABHIM 2021 — और इस सवाल पर कि इन सब प्रयासों के बावजूद भारत में जेब से होने वाला व्यय (out-of-pocket expenditure) कुल स्वास्थ्य व्यय का ~47% क्यों बना हुआ है।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह GS-II का एक बारहमासी परीक्षित विषय है। Prelims में: NHP लक्ष्य, PMJAY पात्रता, HWC सेवाएँ, IPHS मानक (2018, 2020, 2022, 2024 में पूछे गए)। Mains में: लगभग हर वर्ष प्रकट होता है — "PMJAY का मूल्यांकन करें" (2019), "NHP 2017 बनाम UHC" (2021), "प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को सुदृढ़ करना" (2024)। Interview में: COVID-19 के सबक को देखते हुए यह एक प्रमुख जाँच-क्षेत्र है।
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