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वैकल्पिक विषय — भूगोलप्रारंभिक: कममुख्य परीक्षा: उच्चसाक्षात्कार: मध्यम25 मिनट में पढ़ेंअपडेट किया गया 2026-06-02

Paper I

Paper I — Settlement geography · rural, urban

कहानी से शुरुआत

1928 में, फ्रांसीसी भूगोलवेत्ता Albert Demangeon गैस्कनी के Préchac गाँव में खड़े थे और उन्होंने एक अत्यंत सरल-सा किंतु गहरा प्रश्न पूछा: यह घर यहाँ क्यों है, और वहाँ क्यों नहीं? इस प्रश्न का उत्तर खोजते-खोजते चार दशकों की géographie de l'habitat rural — ग्रामीण आवास भूगोल — की नींव पड़ी। Demangeon और उनके शिष्य Jean Brunhes ने सूक्ष्म क्षेत्र-सर्वेक्षणों के माध्यम से यह प्रमाणित किया कि एक ही फ्रांसीसी गाँव में गैलो-रोमन काल की खेत-विभाजन व्यवस्था, मध्यकालीन bocage भूखंड, 19वीं सदी के enclosure आंदोलन और 20वीं सदी की राजमार्ग परियोजनाओं के अवशेष एक साथ मिलते हैं। वह बस्ती एक palimpsest (बहु-लिखित पांडुलिपि) थी — जो दो हजार वर्षों में बार-बार लिखी और मिटाई गई थी।

इधर Heidelberg में 1933 में, Walter Christaller ने दक्षिणी जर्मनी के नगरों को एक षट्भुजीय (hexagonal) जाल (lattice) पर आरोपित किया (देखें — Economic Geography मॉड्यूल) और नगरीय बस्ती को एक नियमितताओं का विज्ञान बना दिया — नगर अनियमित नहीं होते, वे range और threshold के नियमों का पालन करते हैं। 1949 में, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के भारतीय भूगोलवेत्ता R.L. Singh ने भारतीय ग्राम-प्रारूप श्रृंखला (Indian village-typology series) प्रकाशित करना आरंभ किया, जो अगले आधी सदी तक भारतीय बस्ती भूगोल पर छाई रही। Singh का प्रारूप — clustered (संकुलित), semi-clustered (अर्ध-संकुलित), hamleted (पुरवा-युक्त), dispersed (प्रकीर्ण) — प्रत्येक NCERT अध्याय में स्थान पा गया और Mains वैकल्पिक उत्तरों का आधार-स्तंभ बना हुआ है।

2024 में, पृथ्वी पर 6.6 अरब लोग निवास कर रहे थे, जिनमें से 4.6 अरब (56%) शहरी क्षेत्रों में रहते थे। United Nations World Urbanization Prospects (2024 revision) का अनुमान है कि यह अनुपात 2050 तक 68% तक पहुँचेगा। अकेला भारत 2050 तक 416 मिलियन नए शहरी निवासी जोड़ेगा — किसी भी अन्य देश से अधिक। बस्ती भूगोल — जहाँ मनुष्य रहना चुनते हैं उसका स्थानिक तर्क — अकादमिक परिधि से नीति-केंद्र की ओर स्थानांतरित हो रहा है। यह मॉड्यूल वही है जो UPSC Mains Optional Geography Paper I आपसे ग्रामीण और नगरीय बस्तियों के बारे में जानने की अपेक्षा रखता है।

UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

Paper I का बस्ती भूगोल प्रत्येक Mains Optional परीक्षा में एक सुनिश्चित 20-अंकीय प्रश्न है। परीक्षक द्विध्रुवीय प्रश्नों ("ग्रामीण बनाम नगरीय", "primate city बनाम rank-size", "compact बनाम dispersed") और भारतीय-अनुप्रयोग प्रश्नों (Census Town की स्थिति, smart cities, JNNURM का विकास) को प्राथमिकता देते हैं। जो अभ्यर्थी केवल NCERT-स्तर के प्रतिरूपों को रटते हैं, वे अंक गँवाते हैं; वैकल्पिक विषय में Demangeon, Brunhes, Hudson, Stewart, Berry, Mumford, Lewis Mumford, Harris-Ullman से परिचय और समसामयिक आलोचना की जानकारी को प्रतिफल मिलता है। Indian Census 2011 के बस्ती आँकड़े (2021 जनगणना स्थगन की चेतावनी के साथ) जोड़ें और आपके पास एक सुदृढ़ 250-शब्दीय उत्तर तैयार हो जाता है।

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