Historical special laws
Historical special laws — MISA 1971 · TADA 1985 · POTA 2002 · lessons learnt
कहानी से शुरुआत
समय है 25 जून 1975, करीब रात 11:30 बजे। राष्ट्रपति Fakhruddin Ali Ahmed, प्रधानमंत्री Indira Gandhi की सलाह पर Article 352 के अंतर्गत आपातकाल (Emergency) की उद्घोषणा पर हस्ताक्षर करते हैं। भोर तक Jayaprakash Narayan, Morarji Desai, Atal Bihari Vajpayee, Lal Krishna Advani, Charan Singh — और कुछ ही हफ्तों में हजारों और लोग — Maintenance of Internal Security Act 1971 (MISA) के तहत जेल में बंद हैं। इस अधिनियम की Section 16A, जिसे 39th Constitutional Amendment 1975 द्वारा जोड़ा गया, निवारक निरोध (preventive detention) की न्यायिक समीक्षा (judicial review) का अधिकार ही समाप्त कर देती है।
एक दशक बाद, 23 मई 1985 को, संसद Terrorist and Disruptive Activities (Prevention) Act, 1985 (TADA) अधिनियमित करती है। कारण: Blue Star 1984 के बाद बढ़ती खालिस्तानी (Khalistani) हिंसा + Indira Gandhi की हत्या। TADA पुलिस के समक्ष दिए गए इकबालिया बयानों (confessions) को साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य बनाता है, बिना आरोप-पत्र (chargesheet) के 180 दिन की हिरासत की अनुमति देता है, विशेष न्यायालयों (special courts) का प्रावधान करता है, और निर्दोषता की पूर्व-धारणा (presumption of innocence) को उलट देता है। 1985 से 1995 (जब इसे समाप्त होने दिया गया) के बीच, 76,000+ TADA गिरफ्तारियाँ हुईं किन्तु दोषसिद्धि दर केवल ~1% रही। NHRC (जिसकी स्थापना 1993 में हुई) व्यवस्थागत दुरुपयोग पाती है।
एक और दशक बाद, 28 मार्च 2002 को, NDA-1 सरकार संसद के संयुक्त अधिवेशन (joint sitting of Parliament) के माध्यम से Prevention of Terrorism Act 2002 (POTA) पारित कराती है — 1950 के बाद से ऐसा केवल तीसरा संयुक्त अधिवेशन, और आतंक-रोधी कानून के लिए पहला। कारण: 13 दिसंबर 2001 का संसद पर हमला + 26 दिसंबर 2001 का Akshardham हमला + 9/11 का वैश्विक क्षण। POTA, TADA के कठोर प्रक्रियात्मक ढाँचे को विरासत में लेता है, किन्तु इसमें संगठनात्मक प्रतिबंध (organisational banning), संचार के अवरोधन (interception of communications), और धन की जब्ती (freezing of funds) को जोड़ता है। तीन वर्ष बाद, UPA-1 सरकार 2004 में POTA को निरस्त कर देती है — किन्तु इसकी मूल सामग्री को UAPA 2004 संशोधन में स्थानांतरित कर देती है।
UPSC के लिए यह त्रयी — MISA-TADA-POTA — वह केस-लॉ से भरा इतिहास है जिसके माध्यम से भारत ने सुरक्षा-बनाम-स्वतंत्रता (security-versus-liberty) के संतुलन को परखा (और बार-बार परखा)। परीक्षक "सीखे गए सबक" (lessons learnt) पूछते हैं क्योंकि उन्हें आज भी फिर-फिर सीखा जा रहा है: UAPA 2019 दर्शाता है कि यह चक्र निरंतर जारी है।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह GS-III आंतरिक सुरक्षा का संवैधानिक + नागरिक-स्वतंत्रता (civil-liberties) का मूल है। Mains GS-III में 2017 (सुरक्षा कानून + नागरिक स्वतंत्रताएँ), 2019 (असाधारण कानून), 2022 (UAPA + न्यायिक समीक्षा) में पूछा गया, तथा Mains GS-II में निवारक निरोध के प्रश्नों के रूप में 2013, 2016, 2021 में पूछा गया। Prelims ने MISA + 39th Amendment, TADA Review Committee, Justice Saghir Ahmad के अधीन POTA Review Committee, और UAPA 2004/2008/2019 संशोधनों का परीक्षण किया है। साक्षात्कार बोर्ड इस बात की पड़ताल करते हैं कि अभ्यर्थी राज्य की अनिवार्यता (state necessity) + व्यक्तिगत अधिकारों के बीच कौन-सा सैद्धांतिक संतुलन साधते हैं।
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