Ageing society & welfare of the elderly
Ageing society & welfare of the elderly · Maintenance & Welfare of Parents Act 2007 · silver economy · NPOP
त्वरित उत्तर
भारत में जनसंख्या का बुढ़ाना 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के अनुपात का बढ़ना है — आज लगभग 10 प्रतिशत यानी करीब 10.4 करोड़, और 2050 तक अनुमानतः लगभग 20 प्रतिशत यानी 34.7 करोड़ — जिसका कारण घटती प्रजनन दर और बढ़ती जीवन प्रत्याशा है। भारत की प्रतिक्रिया है माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम 2007, वृद्धजन हेतु राष्ट्रीय नीति 1999 और अनुच्छेद 41।
कहानी से शुरुआत
भारत अपनी युवा आबादी के लिए प्रसिद्ध है — लगभग 28 वर्ष की औसत आयु वाला "जनसांख्यिकीय लाभांश (demographic dividend)" का देश। लेकिन इस युवा गाथा के भीतर एक शांत, अनसुनी कहानी छुपी है जो इस सदी के उत्तरार्ध को परिभाषित करेगी: भारत भी तेज़ी से वृद्ध हो रहा है। आज लगभग 104 मिलियन (10.4 करोड़) भारतीय 60 वर्ष से अधिक उम्र के हैं — यह संख्या अधिकांश देशों की कुल जनसंख्या से भी अधिक है। 2050 तक यह संख्या तीन गुने से अधिक होकर ~347 मिलियन तक पहुँच जाएगी, यानी पाँच में से लगभग एक भारतीय। तब भारत में 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से अधिक बुजुर्ग होंगे।
और यह वृद्धावस्था भारत के धनी बनने से पहले आ रही है — यह चिंता कि भारत "अमीर होने से पहले बूढ़ा हो जाएगा।" पारंपरिक सामाजिक सुरक्षा जाल — संयुक्त परिवार — कमज़ोर पड़ रहा है क्योंकि बच्चे काम के लिए पलायन कर रहे हैं और परिवार एकल हो रहे हैं। कई बुजुर्ग तिहरे संकट से जूझते हैं: कोई पेंशन नहीं, बहुत कम जेरियाट्रिक (geriatric) डॉक्टरों के साथ बढ़ती स्वास्थ्य आवश्यकताएँ, और एकाकीपन। सबसे बड़ा बोझ बुजुर्ग महिलाओं पर पड़ता है, जो अधिक जीती हैं और प्रायः विधवा तथा आश्रित होती हैं — यह वृद्धावस्था का स्त्रीकरण (feminisation of ageing) है।
भारत ने जवाब देना शुरू कर दिया है — एक ऐसे कानून के साथ जो बच्चों को अपने माता-पिता का भरण-पोषण करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य करता है (माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 — Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007), योजनाओं के एक विस्तृत समूह के साथ, और इस बढ़ती समझ के साथ कि बुजुर्ग केवल बोझ नहीं बल्कि अवसर की "सिल्वर अर्थव्यवस्था (silver economy)" भी हैं। वृद्धावस्था वह जनसांख्यिकीय संक्रमण है जिसे भारत नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह GS-I (समाज) और GS-II (सामाजिक क्षेत्र नीति) का उभरता, उच्च-प्रतिफल विषय है। Prelims माता-पिता भरण-पोषण अधिनियम 2007, वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय नीति (National Policy for Older Persons) और बुजुर्ग योजनाओं (Rashtriya Vayoshri, AVYAY, Ayushman for 70+) की परीक्षा लेता है। Mains और साक्षात्कार जनसांख्यिकीय वृद्धावस्था + टूटते संयुक्त परिवार + silver economy की रूपरेखा का उपयोग करते हैं। यह जनसांख्यिकीय लाभांश और परिवार विषयों का पूरक है।
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