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Digital society & social media

Digital society & social media · misinformation · digital divide · online polarisation · gig culture

12 मिनट में पढ़ें · अपडेट किया गया 2026-06-02

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भारत का डिजिटल समाज क्या है?

भारत का डिजिटल समाज वह सामाजिक जीवन है जिसे 80 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने बदल दिया है — 2016 के बाद सस्ते डेटा पर टिका, WhatsApp, YouTube और Instagram का दुनिया का सबसे बड़ा आधार। यह आवाज़ को लोकतांत्रिक बनाता और गिग रोज़गार पैदा करता है, पर साथ ही ग़लत सूचना फैलाता, ध्रुवीकरण और बहुआयामी डिजिटल खाई गहरी करता है; नियमन IT नियम 2021 और DPDP अधिनियम 2023 से होता है।

कहानी

2018 में भारत में भयावह भीड़-हत्याओं (mob lynchings) की एक लहर आई — महाराष्ट्र से असम तक गाँवों में भीड़ ने अजनबियों को पीट-पीटकर मार डाला। इसका कारण लगभग हर बार एक ही था: WhatsApp पर फैलाई गई बच्चा-चोरी की अफवाहें, जिनमें अक्सर छेड़े गए (doctored) वीडियो होते थे। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र ने सबसे क्रूर तरीके से यह जाना कि स्मार्टफोन ने उसके समाज की नस-नस बदल दी है — और झूठ, सच्चाई से कहीं तेज दौड़ सकता है। WhatsApp को संदेश-अग्रेषण (forwarding) सीमित करने पर मजबूर होना पड़ा; सरकार नियम बनाने में जुट गई।

यह प्रसंग भारतीय डिजिटल समाज का एक चेहरा है। दूसरा चेहरा अद्भुत है: एक किसान अपनी फसल के दाम जाँच रहा है, एक छोटे शहर का छात्र YouTube पर कोडिंग सीख रहा है, एक महिला उद्यमी Instagram पर बेच रही है, #MeToo आंदोलन दबी हुई आवाज़ों को मंच दे रहा है, और एक गिग कर्मी (gig worker) किसी ऐप के जरिए कमाई कर रहा है। बमुश्किल एक दशक में — सस्ते डेटा और सस्ते स्मार्टफोन की बदौलत — भारत डिजिटल हाशिये से निकलकर 80 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं वाला देश बन गया और WhatsApp, YouTube तथा Instagram का विश्व का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता आधार बन गया।

सोशल मीडिया अब भारत में सामाजिक बदलाव की एक प्रमुख शक्ति बन चुका है — यह बदल रहा है कि भारतीय कैसे काम करते हैं, विरोध करते हैं, रिश्ते बनाते हैं, पूजा करते हैं, खरीदारी करते हैं और झगड़ते हैं। यह एक साथ आवाज़ का लोकतंत्रीकरण (democratises voice) और विभाजन को गहरा भी करता है; यह आजीविका सृजित करता है और एक अनिश्चित नए मज़दूर वर्ग को भी जन्म देता है; यह सूचित करता है और गुमराह भी करता है। डिजिटल समाज को समझना अब वैकल्पिक नहीं रहा — यह भारतीय सामाजिक जीवन को बदलने वाला सबसे नया और सबसे तेज इंजन है।

UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह GS-I (समाज) का एक तेजी से उभरता, समसामयिक मामलों से भरपूर विषय है, जिसका GS-II (शासन/विनियमन) और GS-III (प्रौद्योगिकी) से भी गहरा जुड़ाव है। Mains और Interview में गलत सूचना (misinformation), डिजिटल विभाजन (digital divide), ऑनलाइन ध्रुवीकरण/सुरक्षा (online polarisation/safety) और गिग अर्थव्यवस्था (gig economy) के सामाजिक प्रभाव पर प्रश्न बढ़ते जा रहे हैं। यह सामाजिक बदलाव का सबसे समकालीन दृष्टिकोण है और वैश्वीकरण, Digital Public Infrastructure (DPI) तथा DPDP Act के साथ जुड़कर चलता है।