Socio-religious reform
Socio-religious reform · Brahmo, Arya, Prarthana, Aligarh
8 मिनट में पढ़ें · अपडेट किया गया 2026-06-01
त्वरित उत्तर
सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के आरंभ के वे प्रयास थे जिन्होंने भारतीय धर्म और समाज को सुधारने का काम किया। सुधारवादी धारा में राजा राम मोहन राय का 1828 का ब्रह्म समाज, 1867 का प्रार्थना समाज और सैयद अहमद खान का 1875 का अलीगढ़ आंदोलन थे; पुनरुत्थानवादी धारा में दयानंद का 1875 का आर्य समाज और विवेकानंद का 1897 का रामकृष्ण मिशन।
कहानी
तारीख है 4 दिसंबर 1829। Lord William Bentinck Regulation XVII of 1829 पर हस्ताक्षर करते हैं — सती प्रथा का उन्मूलन (abolition of Sati) — जो "आधुनिक भारत के जनक" Raja Ram Mohan Roy के नेतृत्व में चले 7 वर्ष लंबे अभियान का परिणाम था। पहली बार किसी औपनिवेशिक राज्य ने एक भारतीय सुधारक के अनुरोध पर सामाजिक-धार्मिक सुधार (socio-religious reform) को कानूनी रूप दिया।
अगली एक सदी में, सुधार आंदोलनों का एक जाल (network) — Brahmo Samaj, Young Bengal, Arya Samaj, Prarthana Samaj, Aligarh Movement, Theosophical Society, Ramakrishna Mission, Self-Respect Movement, Ad Dharm, Satyashodhak Samaj — हिंदू + मुस्लिम + सिख + पारसी समुदायों को नए सिरे से गढ़ देगा। सती + बाल विवाह + विधवा पुनर्विवाह + अस्पृश्यता + स्त्री शिक्षा — ये सब सार्वजनिक बहस, कानूनी कार्रवाई और सामाजिक लामबंदी के विषय बन जाते हैं।
UPSC के लिए यह सामाजिक इतिहास का सबसे अधिक पूछे जाने वाला समूह (cluster) है — एक सघन तथ्यात्मक मैट्रिक्स।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
UPSC के लिए:
- Prelims: सुधार संगठन + संस्थापक + तिथियाँ + प्रकाशन; सती उन्मूलन 1829; Widow Remarriage Act 1856; Age of Consent Act 1891; Sarda Act 1929।
- Mains GS-I: भारतीय पुनर्जागरण (Indian Renaissance) की बहस; स्त्री + जाति सुधार; पुनरुत्थानवादी बनाम सुधारवादी विभाजन; मुस्लिम Aligarh प्रतिक्रियाएँ; सुधार की वर्ग-सीमाएँ।
- Interview: Phule + Ambedkar निरंतरता; Periyar की स्थायी DMK विरासत।