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भारतीय इतिहासप्रारंभिक: उच्चमुख्य परीक्षा: उच्चसाक्षात्कार: मध्यम13 मिनट में पढ़ेंअपडेट किया गया 2026-06-01

Economic impact of colonialism

Economic impact of colonialism · Drain of Wealth · deindustrialisation · commercialisation of agriculture

कहानी से शुरुआत

1750 में भारत दुनिया के लगभग एक-चौथाई विनिर्मित माल (manufactured goods) का उत्पादन करता था — धरती के सबसे बेहतरीन सूती वस्त्र, जो ढाका (Dhaka), मुर्शिदाबाद (Murshidabad) और कोरोमंडल (Coromandel) तट पर बुने जाते थे और काहिरा (Cairo) से लेकर कैंटन (Canton) तक उनका व्यापार होता था। 1900 तक, डेढ़ सदी के ब्रिटिश शासन के बाद, यह हिस्सेदारी गिरकर लगभग 2% रह गई। ढाका के करघे (looms) मौन हो गए; गवर्नर-जनरल William Bentinck ने रिपोर्ट किया कि "भारत के मैदान सूती बुनकरों की हड्डियों से सफेद हो रहे हैं (the bones of the cotton-weavers are bleaching the plains of India)।"

जो हुआ वह प्रगति का कोई संयोग नहीं था। वह नीति (policy) थी। लंदन में रहने वाले एक 55 वर्षीय पारसी व्यवसायी Dadabhai Naoroji ने इसे सिद्ध करने के लिए दशकों तक आँकड़े जुटाए। अपनी पुस्तक Poverty and Un-British Rule in India (1901) में उन्होंने इस परिघटना को एक ऐसा नाम दिया जो राज (Raj) का नैतिक अभियोग बन गया: "Drain of Wealth" (धन का बहिर्गमन) — साल-दर-साल भारत के धन का ब्रिटेन की ओर एकतरफा हस्तांतरण (unilateral transfer), जिसका कोई आर्थिक प्रतिफल (no economic return) नहीं था। Naoroji ने इस रिसाव का अनुमान £30-40 मिलियन प्रति वर्ष लगाया।

यह बहिर्गमन (drain), भारतीय उद्योग का विनाश, किसानों का अनाज से नकदी फसलों की ओर बलात् स्थानांतरण, और वे कठोर भूमि-कर जिन्होंने अकाल को सामूहिक मृत्यु में बदल दिया — ये सब साम्राज्य की आर्थिक मशीनरी (economic machinery of empire) थे। और राष्ट्रवादियों द्वारा उस मशीनरी का पर्दाफाश — Naoroji द्वारा, R.C. Dutt द्वारा, Ranade और Gokhale द्वारा — ने वह कर दिखाया जो कोई दंगा नहीं कर सकता था: इसने राज से उसका वह नैतिक दावा छीन लिया (stripped the Raj of its moral claim) कि वह भारत के भले के लिए भारत पर शासन कर रहा है। इस तरह अर्थशास्त्र भारतीय राष्ट्रवाद की आधारशिला बना।

UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह एक Mains-केंद्रित विषय है (GS-I आधुनिक इतिहास, और आर्थिक-इतिहास के ढाँचे के लिए GS-III) और एक स्थिर Prelims स्रोत भी — Drain of Wealth और उसके सिद्धांतकार (Naoroji, Dutt), शोषण के तीन चरण (three stages of exploitation), deindustrialisation (विऔद्योगीकरण), commercialisation of agriculture (कृषि का व्यावसायीकरण), और भूमि-राजस्व–अकाल का संबंध (land-revenue–famine link)। Mains आपसे ब्रिटिश शासन के आर्थिक प्रभाव का आकलन (assess the economic impact of British rule) और उदारवादी राष्ट्रवाद की बुनियाद के रूप में उपनिवेशवाद की आर्थिक समीक्षा (economic critique of colonialism) करने को कहता है। Interview बोर्ड "drain" थीसिस की तुलना "आधुनिकीकरण (modernisation)" (railways, कानून) के प्रति-दावे से करते हैं।

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