Dr B.R. Ambedkar & the anti-caste movement
Dr B.R. Ambedkar & the anti-caste movement · Mahad · temple entry · Poona Pact · annihilation of caste
कहानी से शुरुआत
20 मार्च 1927 को कई हज़ार "अछूतों" का एक जुलूस Bombay Presidency के Mahad स्थित Chavdar tank की ओर बढ़ा और सदियों से वर्जित एक काम कर डाला: उन्होंने वहाँ का पानी पिया। उनका नेतृत्व कर रहे थे एक 36 वर्षीय बैरिस्टर, जिनके पास Columbia और London School of Economics की डॉक्टरेट उपाधियाँ थीं — Bhimrao Ramji Ambedkar। पानी कोई विशेष नहीं था; विशेष था वह कृत्य। अगले दिन सवर्ण हिंदुओं ने गोबर और प्रार्थनाओं से तालाब को "शुद्ध" किया। उसी वर्ष दिसंबर में, उसी Mahad में, Ambedkar ने इससे भी अधिक क्रांतिकारी काम किया — उन्होंने उस प्राचीन विधि-ग्रंथ Manusmriti को सार्वजनिक रूप से जलाया, जो जाति को धार्मिक मान्यता देता था।
यह एक नये प्रकार का नेता था। ऐसा सुधारक नहीं जो ऊँची जातियों से दयालु बनने की प्रार्थना करे, बल्कि एक विद्वान-क्रांतिकारी जो माँग करता था कि निम्नतम को अधिकारों वाले समान नागरिकों के रूप में देखा जाए, न कि दया का पात्र। जहाँ Gandhi उन्हें Harijan ("ईश्वर की संतान") कहते थे और हिंदू धर्म के भीतर से ही सुधार चाहते थे, वहीं Ambedkar उन्हें Dalit ("टूटे हुए लोग") कहते थे और इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि जाति का सुधार नहीं हो सकता — इसका उन्मूलन (annihilation) होना चाहिए। Poona Pact (1932) को लेकर उनका टकराव आधुनिक भारत की महान बहसों में से एक है।
Ambedkar की यात्रा Chavdar tank से लेकर Constituent Assembly तक चली, जहाँ उन्होंने उस समिति की अध्यक्षता की जिसने संविधान का प्रारूप तैयार किया और अस्पृश्यता को कानून से बाहर कर दिया (Article 17)। यह यात्रा 14 अक्टूबर 1956 को Nagpur में समाप्त हुई, जहाँ — अपनी मृत्यु से कुछ महीने पहले — उन्होंने पाँच लाख अनुयायियों को हिंदू धर्म से निकालकर बौद्ध धर्म में प्रवेश कराया। "मैं हिंदू पैदा हुआ," उन्होंने कहा, "लेकिन हिंदू के रूप में नहीं मरूँगा।"
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
Ambedkar तीनों चरणों में और कई विषयों में अत्यधिक उपयोगी हैं (Modern History, Social Justice, Polity, Ethics)। Prelims उनके आंदोलनों (Mahad, Kalaram), संगठनों, पत्रिकाओं, Poona Pact और 1956 के धर्मांतरण को परखता है। Mains GS-I जाति पर Gandhi-Ambedkar बहस और स्वतंत्रता संग्राम के सामाजिक-सुधार आयाम का उपयोग करता है; GS-II संवैधानिक रक्षोपायों और आरक्षण में उनकी भूमिका को परखता है। Interview बोर्ड — जहाँ उनका समकालीन कद विशाल है — Harijan बनाम Dalit, "annihilation of caste", और "राजनीतिक बनाम सामाजिक लोकतंत्र" पर प्रश्न पूछते हैं।
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