Wildlife
Wildlife · biogeographic zones
कहानी से शुरुआत
1973 में Project Tiger की शुरुआत 9 अभयारण्यों और 14,000 वर्ग किमी क्षेत्र के साथ हुई। इस परियोजना के पीछे एक कठोर तथ्य था: 1900 में भारत में 40,000 बाघ थे; 1972 तक केवल 1,827 बचे थे। परियोजना के पहले निदेशक Kailash Sankhala जब Ranthambore पहुँचे तो 274 वर्ग किमी के उस वन में उन्हें ठीक 14 बाघ मिले। बावन वर्ष बाद, 2022 की अखिल भारतीय बाघ गणना (अप्रैल 2023 में जारी) में 75,800 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले 53 अभयारण्यों में 3,682 बाघ गिने गए — भारत अब विश्व के 75% जंगली बाघों का आवास है। यह आधुनिक पारिस्थितिक इतिहास की एकल सबसे बड़ी संरक्षण-वापसी है।
लेकिन बाघ तो केवल ध्वजवाहक प्रजाति (flagship species) है। भारत पृथ्वी पर दर्ज कुल प्रजातियों का 7-8% अपने 2.4% भूभाग में समेटे हुए है। हम 17 megadiverse देशों में से एक हैं (Conservation International की 1998 की सूची)। भारत में विश्व के 36 जैव-विविधता हॉटस्पॉट में से 4 हैं — Western Ghats, Himalayas, Indo-Burma, और Sundaland (Nicobar)। हमारे यहाँ 1,331 पक्षी प्रजातियाँ, 422 स्तनधारी, 540 सरीसृप, 415 उभयचर, 3,022 मछलियाँ और 49,000 से अधिक पादप प्रजातियाँ हैं।
Rodgers and Panwar (1988) — Wildlife Institute of India के दो वैज्ञानिकों — ने एक तर्कसंगत मानचित्र तैयार किया: 10 जैव-भौगोलिक क्षेत्र, 27 जैव-प्रांत। यह अध्याय दस क्षेत्रों, उनमें बसने वाली ध्वजवाहक प्रजातियों, और उस कानूनी ढाँचे (Wildlife Protection Act 1972, Project Tiger, Project Elephant, Tiger Reserves, Biosphere Reserves, Ramsar wetlands) की समीक्षा करता है जो इस व्यवस्था को जीवित रखता है — या रखने का प्रयास करता है। 2024 के Wayanad भूस्खलन, 2025 में Kuno में चीतों की मौतें, और 2026 की Chilika में शीतकालीन प्रवासी पक्षी गणना — ये अलग-अलग घटनाएँ नहीं हैं; ये सब एक ही खाते की प्रविष्टियाँ हैं।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
UPSC Prelims में 2015 से प्रत्येक वर्ष कम से कम 2-3 जैव-विविधता प्रश्न पूछे गए हैं — Tiger Reserves, Biosphere Reserves, Ramsar Sites, IUCN दर्जा, जैव-भौगोलिक क्षेत्र, ध्वजवाहक प्रजातियाँ, या स्थानिक पौधे। Mains GS-III में 2014, 2017, 2020, 2022, 2024 में सीधे जैव-विविधता-संरक्षण प्रश्न पूछे गए हैं। यह इकाई पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (Prelims paper-2 का प्रिय विषय) को भी पोषित करती है और GS-II अंतर्राष्ट्रीय संबंध (CITES, CBD, Nagoya Protocol) से जुड़ती है।
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