Land reforms
Land reforms · ceiling acts · land records digitisation
भूमि सुधार क्या है?
भूमि सुधार वह राज्य-नीति है जो बदलती है कि कृषि भूमि का स्वामी या जोतदार कौन हो; इसके चार स्तंभ हैं — बिचौलियों की समाप्ति, काश्तकारी सुधार, भूमि सीमा और चकबंदी। भूमि राज्य सूची की प्रविष्टि 18 के तहत राज्य विषय है। ज़मींदारी उन्मूलन सफल रहा, पर सीलिंग क़ानूनों से केवल लगभग 50 लाख एकड़ बँटी। अब काम डिजिटल है — 2008 से DILRMP और 24 April 2020 से SVAMITVA।
कहानी से शुरुआत
9 दिसंबर 1955 को, महाराष्ट्र के एक 24 वर्षीय पूर्व पहलवान Vinoba Bhave आंध्र प्रदेश के तेलंगाना (Telangana) क्षेत्र के एक गाँव में पहुँचे। Communist Party of India के सशस्त्र विद्रोह — Telangana Rebellion (1946-51) — को समाप्त हुए चार साल बीत चुके थे, फिर भी हजारों भूमिहीन किसान अब भी पुनर्वितरण की माँग कर रहे थे। Bhave 1951 से अपने Bhoodan Movement (भूदान आंदोलन) में गाँव-गाँव पैदल घूम रहे थे, और भूमिधारी ब्राह्मणों तथा जमींदारों से अपनी जमीन का एक हिस्सा भूमिहीनों को दान करने का अनुरोध कर रहे थे। 1958 तक, 42 लाख एकड़ भूमि दान की जा चुकी थी। इनमें से केवल 17 लाख एकड़ ही वास्तव में वितरित हो पाई; शेष या तो विवादित थी, खेती के अयोग्य थी, या बस सौंपी ही नहीं गई।
पूरे भारत में, यही कहानी दोहराई गई। Zamindari abolition (1948-56) ने ~7 करोड़ एकड़ भूमि ~2 करोड़ काश्तकारों को हस्तांतरित कर दी। 1950 के दशक के Tenancy reforms ने कुछ काश्तकार अधिकारों को औपचारिक रूप दिया। Land ceiling acts (1960s-72) ने यह सीमा तय की कि एक परिवार कितनी भूमि रख सकता है; अधिशेष भूमि को पुनर्वितरित किया जाना था। लेकिन 1992 तक, 50 साल के कानून बनने के बावजूद, ceiling कानूनों के तहत भारत के शुद्ध कृषि क्षेत्र (net cultivated area) का 1% से भी कम पुनर्वितरित हुआ था। 40 लाख एकड़ घोषित अधिशेष मुकदमेबाजी में फँसी रही — सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज, पर भूमिहीनों के हाथों में नहीं।
Bhave की पहली पदयात्रा के पैंसठ साल बाद, 2020 में, मोदी सरकार ने SVAMITVA शुरू किया — गाँव की आबादी (abadi) वाली भूमि का सर्वेक्षण करने और डिजिटल संपत्ति कार्ड जारी करने के लिए ड्रोन (drones) का उपयोग। 2024 तक, 3 करोड़ संपत्ति कार्ड जारी किए जा चुके थे। Land records digitisation (DILRMP) 95% राजस्व गाँवों में पूरा हो चुका था। National Land Pin Code परियोजना चल रही थी। भारत अचानक विकासशील दुनिया का सबसे महत्वाकांक्षी भूमि डिजिटलीकरण प्रयोग बन गया।
भारत ने भूमि सुधार से वास्तव में क्या हासिल किया? और जब अंतर्निहित असमानता बनी हुई है, तो क्या डिजिटलीकरण मायने रखता है?
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
भूमि सुधार GS-III (अर्थव्यवस्था) + GS-II (कल्याण) + GS-I (सामाजिक संरचना) के संगम पर बैठता है। UPSC ने land ceiling acts (2014, 2018), Bhoodan (2017), DILRMP (2017, 2021), SVAMITVA (2021, 2023) के बारे में पूछा है। भूमि सुधार के "unfinished agenda" + बाज़ार-अनुकूल सुधार (model land leasing) पर Mains प्रश्न हर 2-3 साल में आते हैं। 2020 का SVAMITVA + 2023 का Forest Conservation Amendment विवाद इसे एक high-yield Mains + Interview विषय बनाते हैं।
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