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भारतीय अर्थव्यवस्थाप्रारंभिक: उच्चमुख्य परीक्षा: उच्चसाक्षात्कार: मध्यम12 मिनट में पढ़ेंअपडेट किया गया 2026-06-01

Inclusive growth schemes

Inclusive growth schemes · MGNREGA · DBT · UBI debate

कहानी से शुरुआत

समय है अप्रैल 2020 का मध्य। भारत दुनिया के सबसे सख़्त lockdown के तीन सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। ट्रेनें रुक गई हैं। निर्माण-स्थल वीरान पड़े हैं। 80+ लाख प्रवासी श्रमिक पैदल अपने घर लौट रहे हैं — Mumbai से Bihar, Surat से UP, Delhi से Madhya Pradesh — कुछ लोग तो 1,200 किमी पैदल। टेलीविज़न कैमरे इस बदहाली को कैद कर रहे हैं।

Krishi Bhavan स्थित Ministry of Rural Development के दफ़्तर में अधिकारी आनन-फानन में एक गणना कर रहे हैं। Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (MGNREGA) ठीक ऐसे ही पलों के लिए बनी अंतिम-उपाय की नीतिगत जीवनरेखा रहा है। यह Act प्रति ग्रामीण परिवार प्रति वर्ष 100 दिन का अकुशल मज़दूरी-श्रम अधिसूचित मज़दूरी पर सुनिश्चित करता है। जैसे-जैसे प्रवासी अपने गाँव लौटे, MGNREGA में नामांकन तेज़ी से बढ़ा।

FY 2020-21 के अंत तक, MGNREGA ने 389 करोड़ व्यक्ति-दिवस (person-days) का काम दिया था — अपने 15 साल के इतिहास में सबसे अधिक — 11.2 करोड़ परिवारों को। कुल खर्च: ₹1.11 लाख करोड़ (मूल बजट ₹61,500 करोड़ की तुलना में — 80% अधिक)। यह किसी भी देश द्वारा COVID के दौरान चलाया गया सबसे बड़ा प्रति-चक्रीय (counter-cyclical) रोज़गार हस्तक्षेप था।

तीन साल बाद, मई 2024 में, वही MGNREGA एक अलग कोण से आलोचना का शिकार था। निरंतर बजट आवंटन घटकर ₹86,000 करोड़ रह गया था। मज़दूरी भुगतान में देरी औसतन 39 दिन थी। Aadhaar-आधारित भुगतान प्रणाली की विसंगतियों (mismatches) ने चरम पर 8 करोड़ श्रमिक खातों को निष्क्रिय कर दिया था। Direct Benefit Transfer (DBT) प्रणाली, जो MGNREGA मज़दूरी को संचालित करती थी, बिचौलियों को हटाने में इतनी कुशल हो गई थी कि कुछ मामलों में उसने श्रमिकों को भी हटा दिया — जब नाम Aadhaar से बिल्कुल मेल नहीं खाते थे। और Indian Statistical Institute के अर्थशास्त्री तर्क दे रहे थे कि भारत को लक्षित (targeted) योजनाओं में फेरबदल करना बंद कर देना चाहिए और एक Universal Basic Income (UBI) — सभी नागरिकों को एक समान मासिक अंतरण (flat monthly transfer) — की ओर बढ़ना चाहिए।

"समावेशी वृद्धि" (inclusive growth) क्या है, और भारत के सुरक्षा-कवच (safety-net) का ढाँचा कैसा दिखता है?

UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

समावेशी-वृद्धि की योजनाएँ एक मानक GS-III विषय हैं — Prelims में MGNREGA + DBT + JAM त्रयी (2014, 2017, 2019, 2022, 2024) और UBI (2017, 2021, 2024) पर प्रश्न आते हैं। प्रति-चक्रीय रोज़गार, लक्षित बनाम सार्वभौमिक कल्याण, DBT बचत पर Mains प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। सामाजिक-क्षेत्र खर्च पर 2024 Economic Survey का अध्याय + 2017 Economic Survey का UBI प्रस्ताव किसी भी उत्तर के लिए आधार-बिंदु (touchstones) हैं।

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