Lokpal and Lokayuktas
Lokpal and Lokayuktas
कहानी से शुरुआत
5 अप्रैल 2011, जंतर मंतर, दिल्ली। रालेगण सिद्धि के 74 वर्षीय गांधीवादी कार्यकर्ता अन्ना हजारे अनशन पर बैठ जाते हैं — अनिश्चितकालीन। उनकी माँग एक वाक्य में थी: नागरिक समाज द्वारा तैयार जन लोकपाल विधेयक लागू किया जाए। कुछ घंटों में कुछ सैकड़ों लोगों का जमावड़ा पंद्रह हजार तक पहुँच गया। लाइव TV कैमरे चल पड़े। Twitter पर hashtags ट्रेंड होने लगे। बॉलीवुड सितारे, सेवानिवृत्त नौकरशाह, छात्र — सब जुड़ गए। 8 अप्रैल 2011 तक सरकार ने नागरिक समाज के साथ संयुक्त मसौदा समिति गठित करने पर सहमति जता दी। India Against Corruption (भारत भ्रष्टाचार के विरुद्ध) आंदोलन ने भारतीय राजनीतिक सौदेबाज़ी के नियम बदल दिए थे।
किंतु आगे का रास्ता अत्यंत पेचीदा था। तीन साल में तीन विधेयक। पहला Lokpal Bill 2011 राज्यसभा में पारित नहीं हो सका। दूसरा Bill 2013 अंततः 17 दिसंबर 2013 को अधिनियमित हुआ और 16 जनवरी 2014 से प्रभावी हुआ। पाँच वर्ष और बीते। चयन समिति की केवल एक बैठक हुई। खोज समिति की कार्यवाही राजनीतिक रूप से विवादास्पद होती रही। अंततः, 23 मार्च 2019 — ARC I द्वारा 1966 में पहली बार प्रस्ताव किए जाने के 47 वर्ष बाद — न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष भारत के पहले लोकपाल बने।
लोकपाल की वैचारिक जड़ें और भी गहरी हैं — स्वीडन के 1809 के Ombudsman तक, जो विश्व का पहला ऐसा कार्यालय था। L.M. Singhvi ने 1963 में लोकसभा की बहसों में "लोकपाल" शब्द गढ़ा। अवधारणा से पहली नियुक्ति तक भारत का इंतज़ार 52 वर्ष का रहा। Lokayukta की यात्रा तुलनात्मक रूप से तेज रही — महाराष्ट्र 1971 में Lokayukta स्थापित करने वाला पहला राज्य बना।
संस्था अंततः अस्तित्व में है। लेकिन हर साक्षात्कार पैनल का वह प्रश्न अभी भी बना हुआ है: क्या यह काम करती है?
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
Lokpal + Lokayuktas Prelims में वर्ष में 1-2 बार आते हैं (अधिनियम की विशेषताएँ, पहले लोकपाल की तारीख, संरचना, अधिकार क्षेत्र की सीमाएँ)। ये Mains GS-II का प्रमुख विषय हैं — भ्रष्टाचार-विरोधी संस्थागत ढाँचा, कार्यकारी जवाबदेही, Ombudsman की अवधारणा। साक्षात्कार पैनल नियमित रूप से CVC + CBI + Vigilance Commissions के साथ तुलना पर परीक्षण करते हैं। 2023-24 में Lokpal द्वारा पहला अभियोजन ताज़ा समसामयिक घटना है।
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