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आपदा प्रबंधनप्रारंभिक: मध्यममुख्य परीक्षा: उच्चसाक्षात्कार: मध्यम12 मिनट में पढ़ेंअपडेट किया गया 2026-06-02

Sphere Standards

Sphere Standards · humanitarian charter · minimum standards in response

कहानी से शुरुआत

जुलाई 1994गोमा, पूर्वी ज़ायर (अब DR Congo)। रवांडा नरसंहार से भागे बीस लाख रवांडाई शरणार्थी लेक Kivu के उत्तर में ज्वालामुखी-शैल भूमि पर शिविर लगाए हुए थे। कुछ ही हफ्तों में शिविरों में एक भयंकर हैज़ा (cholera) महामारी फैल गई — तीन हफ्तों में 50,000 लोगों की मौत। अंतर्राष्ट्रीय NGOs का जमावड़ा था। आपूर्ति के ट्रक आ रहे थे। लेकिन अफरा-तफरी पूरी तरह थी — दोहरे-दोहरे शिविर, बिना शुद्धिकरण का पानी, कुओं के पास बनी सफाई की खाइयाँ, नज़दीकी बाज़ारों में बिकती खाद्य सहायता, और बेहद असमान स्वास्थ्य सेवाएँ।

एक संयुक्त मूल्यांकन — Joint Evaluation of Emergency Assistance to Rwanda (1996) — ने कड़ा निर्णय सुनाया: मानवीय सहायता उन लोगों की मदद करने में विफल रही जिनके लिए वह थी। कोई साझा मानक नहीं था। कोई जवाबदेही नहीं। NGOs सहयोग के बजाय एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे थे। समुदायों को भागीदार नहीं, बल्कि केवल लाभार्थी माना गया।

इस शर्मनाक विफलता से उपजी एक पहल — 1997 में International Federation of Red Cross and Red Crescent Societies (IFRC) और NGOs के एक गठबंधन — Oxfam, MSF, CARE, Save the Children, World Vision — ने The Sphere Project की शुरुआत की। 2000 तक पहली Sphere Handbook — Humanitarian Charter and Minimum Standards in Humanitarian Response प्रकाशित हो चुकी थी। आज, इसके 2018 चौथे संस्करण में, Sphere Handbook मानवीय सहायता में सबसे व्यापक रूप से जाने-माने और लागू किए जाने वाले सिद्धांतों एवं मानकों का समुच्चय है — जो 150 से अधिक देशों में, भारत सहित, उपयोग में है।

UPSC के लिए, Sphere Standards आपदा प्रबंधन पाठ्यक्रम के आपदा-पश्चात राहत एवं प्रतिक्रिया आयाम को आधार देते हैं। ये "जीवन की गरिमा का अधिकार" जैसे अमूर्त सिद्धांतों को ठोस संख्याओं में बदलते हैं — प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 15 लीटर पानी, 3.5 वर्ग मीटर ढका रहने का स्थान, प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2,100 किलोकैलोरी भोजन — जिनकी परीक्षाओं में बार-बार जाँच होती है।

UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

GS-III में आपदा प्रबंधन के अंतर्गत राहत एवं प्रतिक्रिया शामिल है। Sphere Standards Mains 2017, 2019, 2022 में आए हैं और Prelims में चार न्यूनतम-मानक क्षेत्रों तथा 1997 की उत्पत्ति की जाँच हुई है। Interview में परीक्षक गरिमा बनाम राशनिंग के द्वंद्व और Sphere के साथ भारत के NDMA एवं NDRF की समानता को टटोलते हैं।

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