Folk and tribal dances
Folk and tribal dances — region-wise mapping (Bhangra, Garba, Lavani, Bihu, Chhau, Ghoomar, Dollu Kunitha, Yakshagana, Kalbelia, Karagam, Bhavai)
कहानी से शुरुआत
Amritsar के बाहर एक गाँव में बैसाखी (Baisakhi) है, 13 अप्रैल। गेहूँ की फसल अभी-अभी काटकर लाई गई है। ढोल (dhol) की तेज़ होती थाप पर, पगड़ी और चमकीले चोला (chola) कुर्तों में पुरुषों का एक घेरा अपनी बाँहें ऊपर उठाकर, घुटनों को ऊँचा उठाकर उछलने लगता है — यही Bhangra की पहचान वाली गति है। तीन सौ मील दक्षिण-पूर्व में, Saraikela (Jharkhand) में, शैलीबद्ध वेशभूषा में नकाबपोश नर्तक Chhau का प्रदर्शन कर रहे हैं — एक युद्ध-आनुष्ठानिक नृत्य जहाँ हर पात्र (Hanuman, Krishna, Mahishasura) को उसके चित्रित पपीयर-माशे (papier-mâché) नकाब से पहचाना जाता है। Rajasthan के Thar मरुस्थल में, लगभग उसी समय, Kalbelia सपेरा समुदाय साँप की नकल करते हुए घूमते, लहराते नृत्य करता है — यह परंपरा 2010 में UNESCO द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (Intangible Cultural Heritage) के रूप में मान्य की गई थी।
इसी महीने, Gujarat में, समुदाय Navratri के नौ-रात्रि उत्सव की तैयारी कर रहे हैं — जब Garba घेरा-नृत्य Ahmedabad और Vadodara की हर गली में फैल जाएगा। Maharashtra में, Lavani नर्तक स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के गाँव-समारोहों के लिए अपनी विशिष्ट अलंकृत नौ-वारी (nau-vari) साड़ियों और तालवाद्य ढोलकी (dholaki) के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं। Assam में, Bihu नर्तक Rongali Bihu वसंत-उत्सव की तैयारी कर रहे हैं, जब पूरा राज्य ढोल-पेपा-गोगोना (dhol-pepa-gogona) वाद्य-समूह पर नाचेगा।
भारत का लोक एवं जनजातीय नृत्य मानचित्र (folk and tribal dance map) अपने शास्त्रीय संग्रह से कहीं अधिक सघन है। जहाँ शास्त्रीय नृत्य आठ हैं, वहीं लोक रूप सैकड़ों में हैं — हर राज्य के लिए कम-से-कम एक विशिष्ट रूप, अक्सर हर ज़िले के लिए। UPSC दो चीज़ें परखता है: राज्य-रूप मानचित्रण (state-form mapping) (Bhangra → Punjab, Bihu → Assam) और UNESCO-सूचीबद्ध रूप (UNESCO-listed forms) (Chhau, Kalbelia, Kutiyattam, Ramlila)।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
Prelims हर दूसरे वर्ष लोक नृत्य परखता है — एकल-प्रश्न राज्य-रूप मिलान ("Lavani किस राज्य से जुड़ी है?")। Mains GS-I लोक नृत्य को क्षेत्रीय सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक और सांस्कृतिक भूगोल के एक उदाहरण के रूप में देखता है। भारतीय वस्तुओं की UNESCO अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (UNESCO Intangible Cultural Heritage) सूची एक अलग, उच्च-महत्व वाला Prelims उप-विषय है।
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