Unorganized Sector Workers
Unorganized Sector Workers · Building Construction Act · occupational safety & welfare
कहानी से शुरुआत
सुबह के 7 बजे गुरुग्राम, मुंबई या हैदराबाद में किसी अधनिर्मित ऊँची इमारत की नींव के पास खड़े हो जाइए। एक आदमी 40 मीटर ऊपर बाँस के मचान पर संतुलन बनाए खड़ा है — न हार्नेस, न हेलमेट — हाथ से कंक्रीट मिला रहा है। उसकी पत्नी नीचे से सिर पर ईंटें ढो रही है; उनका छोटा बच्चा सीमेंट मिक्सर की छाँव में जूट की बोरी पर सोया है। दोनों मिलाकर शायद ₹500–600 प्रतिदिन कमाते हैं, साइट पर बनी टिन की झोपड़ी में रहते हैं, और जैसे ही यह इमारत पूरी होगी, अगले प्रोजेक्ट पर चले जाएँगे। सरकारी रिकॉर्ड में ये लोग हैं ही नहीं — न नियोक्ता का ब्योरा, न भविष्य निधि, न बीमा कार्ड।
यह कहानी है लगभग 40 करोड़ भारतीयों की — देश के कुल कार्यबल का लगभग 90% — जो असंगठित क्षेत्र में खटते हैं: खेतों में, निर्माण स्थलों पर, चाय की दुकानों में, घरेलू कामगार के रूप में, सड़क पर सामान बेचने वाले विक्रेता के रूप में, बीड़ी बनाने वाले, सिर पर बोझ उठाने वाले, और आजकल गिग व प्लेटफ़ॉर्म वर्कर के रूप में खाना पहुँचाते या कैब चलाते हुए। ये लोग राष्ट्रीय उत्पादन में बड़ा हिस्सा देते हैं, फिर भी पेंशन, ग्रेच्युटी, सवैतनिक अवकाश और दुर्घटना-बीमा की संस्थागत सुरक्षा से लगभग पूरी तरह बाहर हैं — जिसे ~10% "संगठित" कार्यबल당연한 अधिकार मानता है।
कृषि के बाद निर्माण (Construction) देश का दूसरा सबसे बड़ा रोज़गारदाता है — 5 करोड़ से अधिक श्रमिक — और सबसे खतरनाक भी। जब कोई मचान गिरता है या खाई धँसती है, तो परिवार की एकमात्र क़ानूनी रक्षापंक्ति है — Building and Other Construction Workers (BOCW) Act, 1996 और उसके अंतर्गत बनाया गया राज्य कल्याण बोर्ड। दुखद यह है कि वसूले गए ₹78,000+ करोड़ के उपकर (cess) में से एक बड़ा हिस्सा ऐतिहासिक रूप से खर्च ही नहीं हुआ, जबकि जिन श्रमिकों के लिए यह धन था, वे बेसहारा रहे। कागज़ पर क़ानून और व्यवहार में सुरक्षा के बीच की यह खाई — यही इस विषय का मूल है।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह इकाई श्रम, कल्याण और संघवाद के चौराहे पर खड़ी है — UPSC का चिरस्थायी प्रिय विषय।
- Prelims: सटीक तथ्यात्मक संकेत — BOCW Act 1996, कल्याण उपकर (Cess Act 1996 के तहत निर्माण लागत का 1–2%), चार नए Labour Codes (2019–2020) जो 29 केंद्रीय क़ानूनों को एकत्र करते हैं, e-Shram पोर्टल (2021) और पहली बार गिग/प्लेटफ़ॉर्म वर्करों को परिभाषित करने वाला Code on Social Security 2020।
- Mains (GS-II सामाजिक न्याय + GS-III अर्थव्यवस्था): क्लासिक निबंध समस्या — ऐसे कार्यबल को सामाजिक सुरक्षा कैसे दें जो अनौपचारिक, गतिशील और नियोक्ता-रहित है? साथ ही केंद्र-राज्य नीति सामंजस्य का पहलू — चूँकि श्रम समवर्ती सूची (Concurrent List) में है।
- Interview: परीक्षक देखता है कि क्या आप एक संवैधानिक आदर्श (Article 43 — जीवनयापन योग्य मज़दूरी और सभ्य परिस्थितियाँ) को एक वितरण-विफलता (अखर्चित BOCW उपकर) से जोड़कर व्यावहारिक सुधार सुझा सकते हैं। इसमें लैंगिक पहलू भी उभरता है — पंजीकृत निर्माण श्रमिकों में महिलाएँ छोटा हिस्सा हैं, लेकिन सर्वाधिक असुरक्षित भी हैं।
Supreme Court ने बार-बार हस्तक्षेप किया है — सबसे तीखे रूप में National Campaign Committee for Central Legislation on Construction Labour (NCC-CL) v. Union of India में — जिससे यह एक जीवंत जवाबदेही की कहानी है, न कि कोई धूल खाता क़ानून।
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