Frontline women workers
Frontline women workers — ASHA · Anganwadi · ANM · roles, recognition, remuneration debates
कहानी से शुरुआत
22 मई 2022 — जिनेवा। World Health Assembly तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठी जब WHO के महानिदेशक Tedros Adhanom Ghebreyesus ने भारत की ASHA कार्यबल — सभी 10.4 लाख कार्यकर्ताओं — को Director-General's Global Health Leaders Award से सम्मानित किया। पुरस्कार में लिखा था: "ASHAs भारत की सबसे कठिन सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों — पोलियो उन्मूलन से लेकर COVID-19 टीकाकरण तक — की पहली प्रतिक्रिया हैं।"
उसी वर्ष NSSO Time Use Survey 2019 ने एक महत्त्वपूर्ण तथ्य उजागर किया था: एक आँगनवाड़ी कार्यकर्ता (AWW) प्रतिदिन 9.5 घंटे काम करती है — जिसमें से आधे से अधिक समय प्री-स्कूल शिक्षा और पोषण जैसे मूल कार्यों से इतर सरकारी डेटा प्रविष्टि, निगरानी और रिपोर्टिंग में बीतता है। उसका मानदेय: केवल ₹4,500 प्रति माह (केंद्र का हिस्सा)। राज्यों द्वारा अतिरिक्त भत्ता ₹0 (बिहार) से ₹13,500 (तेलंगाना) तक है। उसे "मानद कार्यकर्ता" (honorary worker) की श्रेणी में रखा गया है — कोई न्यूनतम मजदूरी नहीं, कोई ग्रेच्युटी नहीं, कोई मातृत्व अवकाश नहीं, कोई पेंशन नहीं।
ASHA + AWW + ANM की यह तिकड़ी भारत की अंतिम छोर तक सार्वजनिक स्वास्थ्य + पोषण + प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा वितरण की रीढ़ है। मिलकर ये तीनों 1.4 अरब की जनसंख्या के प्रत्येक गाँव, बस्ती और आदिवासी ढाणी को कवर करती हैं। इनके योगदान से संभव हुआ: MMR में गिरावट 130 → 97/लाख (2014-20), IMR में गिरावट 39 → 28/1000 (2014-20), पूर्ण-टीकाकृत बच्चे 65% → 77% (NFHS-5), संस्थागत प्रसव 79% → 89%, COVID के दौरान घर-घर निगरानी और 220 करोड़ टीके की डोज।
GS-II के नजरिये से यह विषय बढ़ती महत्त्व वाला है — अग्रिम-पंक्ति श्रम, लैंगिक असमानता, अनौपचारिकीकरण, और सामाजिक क्षेत्र व्यय। हर वर्ष कम-से-कम एक PYQ ASHA/AWW को स्पर्श करता है।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
30 लाख की यह अग्रिम-पंक्ति कार्यबल → दुनिया की सबसे बड़ी संगठित महिला श्रम शक्ति। हाल के PYQs: 2018 (ASHA + Universal Health Coverage), 2020 (Poshan Abhiyaan + AWW), 2022 (ASHA + COVID प्रतिक्रिया), 2024 (महिला श्रम अधिकार + मानद कार्यकर्ता वर्गीकरण)।
NHM + ICDS + राज्य बजट मिलाकर संयुक्त वार्षिक परिव्यय लगभग ₹40,000 करोड़; प्रति-कार्यकर्ता मानदेय की बहस राजनीतिक और न्यायिक स्तर पर तेज होती जा रही है।
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