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सामाजिक न्यायप्रारंभिक: मध्यममुख्य परीक्षा: उच्चसाक्षात्कार: उच्च12 मिनट में पढ़ेंअपडेट किया गया 2026-06-02

Frontline women workers

Frontline women workers — ASHA · Anganwadi · ANM · roles, recognition, remuneration debates

आशा (ASHA) क्या है?

आशा (ASHA) यानी मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता गाँव स्तर की स्वयंसेवी स्वास्थ्य कार्यकर्ता है, जिसकी शुरुआत 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत हुई — मैदानी क्षेत्रों में प्रति 1,000 और जनजातीय क्षेत्रों में प्रति 500 की आबादी पर एक। भारत की 10.4 लाख आशाओं के साथ ICDS की लगभग 27 लाख मानदेय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएँ और 2.45 लाख एएनएम काम करती हैं — इनमें केवल एएनएम वेतनभोगी हैं।

कहानी से शुरुआत

22 मई 2022 — जिनेवा। World Health Assembly तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठी जब WHO के महानिदेशक Tedros Adhanom Ghebreyesus ने भारत की ASHA कार्यबलसभी 10.4 लाख कार्यकर्ताओं — को Director-General's Global Health Leaders Award से सम्मानित किया। पुरस्कार में लिखा था: "ASHAs भारत की सबसे कठिन सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों — पोलियो उन्मूलन से लेकर COVID-19 टीकाकरण तक — की पहली प्रतिक्रिया हैं।"

उसी वर्ष NSSO Time Use Survey 2019 ने एक महत्त्वपूर्ण तथ्य उजागर किया था: एक आँगनवाड़ी कार्यकर्ता (AWW) प्रतिदिन 9.5 घंटे काम करती है — जिसमें से आधे से अधिक समय प्री-स्कूल शिक्षा और पोषण जैसे मूल कार्यों से इतर सरकारी डेटा प्रविष्टि, निगरानी और रिपोर्टिंग में बीतता है। उसका मानदेय: केवल ₹4,500 प्रति माह (केंद्र का हिस्सा)। राज्यों द्वारा अतिरिक्त भत्ता ₹0 (बिहार) से ₹13,500 (तेलंगाना) तक है। उसे "मानद कार्यकर्ता" (honorary worker) की श्रेणी में रखा गया है — कोई न्यूनतम मजदूरी नहीं, कोई ग्रेच्युटी नहीं, कोई मातृत्व अवकाश नहीं, कोई पेंशन नहीं।

ASHA + AWW + ANM की यह तिकड़ी भारत की अंतिम छोर तक सार्वजनिक स्वास्थ्य + पोषण + प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा वितरण की रीढ़ है। मिलकर ये तीनों 1.4 अरब की जनसंख्या के प्रत्येक गाँव, बस्ती और आदिवासी ढाणी को कवर करती हैं। इनके योगदान से संभव हुआ: MMR में गिरावट 130 → 97/लाख (2014-20), IMR में गिरावट 39 → 28/1000 (2014-20), पूर्ण-टीकाकृत बच्चे 65% → 77% (NFHS-5), संस्थागत प्रसव 79% → 89%, COVID के दौरान घर-घर निगरानी और 220 करोड़ टीके की डोज

GS-II के नजरिये से यह विषय बढ़ती महत्त्व वाला है — अग्रिम-पंक्ति श्रम, लैंगिक असमानता, अनौपचारिकीकरण, और सामाजिक क्षेत्र व्यय। हर वर्ष कम-से-कम एक PYQ ASHA/AWW को स्पर्श करता है।

UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

30 लाख की यह अग्रिम-पंक्ति कार्यबल → दुनिया की सबसे बड़ी संगठित महिला श्रम शक्ति। हाल के PYQs: 2018 (ASHA + Universal Health Coverage), 2020 (Poshan Abhiyaan + AWW), 2022 (ASHA + COVID प्रतिक्रिया), 2024 (महिला श्रम अधिकार + मानद कार्यकर्ता वर्गीकरण)।

NHM + ICDS + राज्य बजट मिलाकर संयुक्त वार्षिक परिव्यय लगभग ₹40,000 करोड़; प्रति-कार्यकर्ता मानदेय की बहस राजनीतिक और न्यायिक स्तर पर तेज होती जा रही है।

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