Communal terrorism
Communal terrorism · home-grown radicalisation · NIA action
कहानी से शुरुआत
तारीख है 7 मार्च 2022, मंगलुरु, कर्नाटक। नागोरी रोड पर एक निजी बस के भीतर एक प्रेशर-कुकर IED फट जाता है। बीस यात्री घायल होते हैं; एक — Mohammed Shariq, 24 वर्ष, तीर्थहल्ली (Tirthahalli) से इंजीनियरिंग का ड्रॉपआउट — गंभीर रूप से झुलस जाता है और बाद में उसकी पहचान स्वयं बम-धमाका करने वाले (bomber) के रूप में होती है। जब वह उपकरण को हिला रहा था तभी वह समय से पहले (prematurely) फट गया। फॉरेंसिक बरामदगी: ammonium nitrate, एक 9V बैटरी, एक स्मार्टफोन ट्रिगर, और "Premraj Hutagi" नाम का एक नकली Aadhaar। कर्नाटक पुलिस इस मामले को 72 घंटों के भीतर UAPA 1967 के तहत National Investigation Agency को सौंप देती है।
NIA की जाँच एक ऐसे नेटवर्क की परतें खोलती है जिसका नक्शा पहले किसी ने नहीं बनाया था। Shariq एक ISIS Khorasan के ऑनलाइन प्रचार से प्रेरित lone-wolf सेल का सोया हुआ सदस्य (sleeper) था। उसका कट्टरपंथीकरण 2018 और 2020 के बीच encrypted Telegram चैनलों के माध्यम से हुआ, Zakir Naik की प्रशंसा करने वाली ग्रैफिटी को लेकर एक और कर्नाटक FIR के बाद वह 2020 में भूमिगत हो गया, और उसने YouTube + Dark Web के मैनुअल्स के ज़रिये IED बनाना सीखा। न कोई भौतिक मदरसा। न कोई मस्जिद। न ही किसी विदेशी अमीर के प्रति कोई बयत (bayat)। चार्जशीट — जो अगस्त 2022 में NIA Special Court, बेंगलुरु में दाखिल हुई — में UAPA की धाराएँ 16, 18, 20, 38, 39 के साथ IPC 307/120B और Explosive Substances Act 1908 का उपयोग किया गया।
यह भारतीय आतंकवाद का नया चेहरा है: घरेलू (home-grown), इंटरनेट से कट्टरपंथी बना हुआ, अकेला-कर्ता (lone-actor) / सूक्ष्म-सेल (micro-cell), वैचारिक रूप से बिखरा हुआ। LeT/JeM-शैली की पदानुक्रमिक (hierarchical) घुसपैठ का दौर ख़त्म नहीं हुआ है, पर अब यह उन स्वयं-कट्टरपंथी बनने वालों (self-radicalisers) के साथ-साथ मौजूद है जो बेंगलुरु के बेडरूम में PDF पढ़ते हैं। NIA — जो 26/11 मुंबई 2008 के बाद NIA Act 2008 द्वारा बनाई गई — भारत का संघीय (federal) काउंटर-टेरर अन्वेषक है और वह संस्था है जो इस नए खतरे की सतह से सबसे प्रत्यक्ष रूप से आकार लेती है।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
Mains GS-III में 2018 (कट्टरपंथीकरण + सोशल मीडिया की कड़ियाँ), 2020 (आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियाँ), 2022 (NIA की भूमिका), 2024 (कट्टरपंथीकरण का मुकाबला) में पूछा गया। Prelims में NIA Act 2008, UAPA संशोधन 2019, और MAC/SMAC ख़ुफ़िया वास्तुकला (intelligence architecture) का परीक्षण हुआ है। साक्षात्कार बोर्ड यह जाँचते हैं कि भारत को नागरिक स्वतंत्रताओं को बाधित किए बिना ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण का मुकाबला कैसे करना चाहिए — एक ऐसा विषय जहाँ संतुलन और बारीकी अंक दिलाती है।
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