Religious diversity & communalism
Religious diversity & communalism
कहानी से शुरुआत
6 दिसम्बर 1992, अयोध्या। लगभग 1.5 लाख कार सेवक Babri Masjid के पास एकत्र होते हैं — यह एक 16वीं सदी की मस्जिद थी जिसे मुगल बादशाह Babur के सेनापति Mir Baqi ने उस स्थान पर बनवाया था जिसे हिन्दू समूह राम जन्मभूमि मानते थे। दोपहर होते-होते मस्जिद मलबे में बदल जाती है। समूचे भारत में साम्प्रदायिक दंगे भड़क उठते हैं — Mumbai (दो चरणों में 900 से अधिक मौतें), Surat, Delhi, Bhopal। देशभर में लगभग 2,000 लोग इस त्रासदी के तत्काल बाद मारे जाते हैं। Liberhan Commission (1992-2009) को 17 वर्ष लगते हैं रिपोर्ट देने में और वह 68 लोगों को, जिनमें BJP के वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं, विध्वंस के लिए दोषी ठहराता है।
9 नवम्बर 2019 को सर्वोच्च न्यायालय की पाँच न्यायाधीशों की पीठ M. Siddiq v. Mahant Suresh Das मामले में सर्वसम्मत निर्णय सुनाती है: विवादित भूमि हिन्दू पक्ष को राम मंदिर निर्माण हेतु दी जाती है, जबकि Sunni Waqf Board को Ayodhya में ही अन्यत्र 5 एकड़ ज़मीन आवंटित होती है। निर्णय यह भी घोषित करता है कि 1992 का विध्वंस गैरकानूनी था। 22 जनवरी 2024 को PM Modi के हाथों राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह सम्पन्न होता है — बहुतों के लिए ऐतिहासिक आनन्द का क्षण, कुछ के लिए व्यथा का, और समाजशास्त्रीय दृष्टि से एक ऐसी घटना जिसने भारत के धार्मिक-राजनीतिक परिदृश्य को नए सिरे से आकार दिया।
इन दोनों घटनाओं के बीच — Mumbai बम विस्फोट (1993), Gujarat 2002, Kandhamal 2008, Muzaffarnagar 2013, Delhi 2020, Manipur 2023, Citizenship Amendment Act 2019 + इसके नियम 2024 में जारी, अनेक "love jihad" कानून, "हलाल" + "अज़ान" विवाद — धार्मिक विविधता एक साथ भारत की पहचान की सबसे बड़ी विशेषता भी रही है और वह दरार भी जो GS-I और Essay पेपर के लिए बार-बार प्रासंगिक होती है।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
धार्मिक विविधता एवं साम्प्रदायिकता लगभग प्रत्येक वर्ष GS-I + GS-II + Essay में स्थान पाती है। Mains GS-I ने इसे सीधे पूछा है — 2014 में ("साम्प्रदायिकता और क्षेत्रवाद"), 2016 में ("समन्वित संस्कृति + साम्प्रदायिक सौहार्द"), 2017 में ("पहचान-जुड़ाव से उत्पन्न साम्प्रदायिकता") और 2020 में ("भारतीय समाज के लिए साम्प्रदायिकता का खतरा")। यही विषय "धर्मनिरपेक्षता" (Polity), "अल्पसंख्यक अधिकार" (Polity) और "वैश्वीकरण + पहचान" (Society) में भी बार-बार आता है।
Prelims में अनुच्छेद 25-28, NCM, अल्पसंख्यक वर्गीकरण, प्रमुख आयोगों की रिपोर्टें (Sachar 2006, Ranganath Misra 2007) और PoA समकक्ष प्रावधानों के माध्यम से यह विषय परखा जाता है।
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