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भारतीय राजव्यवस्था एवं संविधानप्रारंभिक: उच्चमुख्य परीक्षा: उच्चसाक्षात्कार: मध्यम12 मिनट में पढ़ेंअपडेट किया गया 2026-06-01

Right to Freedom of Religion

Right to Freedom of Religion · Article 25-28

कहानी से शुरुआत

28 सितंबर 2018 को, Supreme Court के मुख्य भवन की दूसरी मंजिल पर, पाँच न्यायाधीश Indian Young Lawyers Association v. State of Kerala मामले में फैसला सुनाने बैठे। इस मामले पर 18 दिनों तक बहस हुई थी। सवाल यह था: क्या Kerala का Sabarimala मंदिर कानूनी रूप से रजस्वला आयु (10-50 वर्ष) की महिलाओं को प्रवेश से रोक सकता है? मंदिर अधिकारियों ने तर्क दिया कि भगवान Ayyappa की ब्रह्मचारी प्रकृति के कारण यह बहिष्करण आवश्यक है — और इसलिए यह प्रतिबंध Article 25 के तहत संरक्षित एक "आवश्यक धार्मिक प्रथा" (essential religious practice) है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि ऐसा बहिष्करण Articles 14, 15, 17, 21 और 25 के तहत महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है — कि अस्पृश्यता धर्म का चोला नहीं ओढ़ सकती

न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में 4:1 से फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश Misra: "धर्म का उपयोग महिलाओं के पूजा के अधिकार से इनकार करने के आवरण के रूप में नहीं किया जा सकता।" न्यायमूर्ति Indu Malhotra ने अकेले असहमति जताते हुए चेतावनी दी: "क्या आवश्यक धार्मिक प्रथा है, यह धार्मिक समुदाय को तय करना है, न्यायालय को नहीं।" इसके बाद हुए विरोध प्रदर्शन — Pamba में, Sabarimala बेस कैंप में, मंदिर के द्वार पर — दशक के सबसे ध्रुवीकरण करने वाले प्रदर्शनों में से थे।

संविधान के Articles 25 से 28 — धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom of Religion) — इन विवादों के लिए संवैधानिक ढाँचा हैं। ये स्वतंत्रता की भाषा में बात करते हैं: "अंतःकरण की स्वतंत्रता तथा धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार।" लेकिन इनमें प्रतिबंध के बीज भी हैं: "लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य के अधीन," और राज्य की यह शक्ति कि वह "धार्मिक प्रथा से जुड़ी किसी भी धर्मनिरपेक्ष गतिविधि को विनियमित कर सके।" यह दोधारी रचना — संरक्षण के साथ-साथ विनियमन की शक्ति — ही भारतीय धर्मनिरपेक्षता को अद्वितीय और निरंतर विवादास्पद बनाती है।

UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

Articles 25-28 किसी भी दशक में सबसे राजनीतिक रूप से आवेशित संवैधानिक मामले उत्पन्न करते हैं — Shayara Bano (तीन तलाक), Sabarimala, Hijab प्रतिबंध (Karnataka 2022), Ram Janmabhoomi (2019), Places of Worship Act चुनौतियाँ (Gyanvapi, Mathura)। Prelims नियमित रूप से पूछेगा कि कौन-सा article किसकी रक्षा करता है; Mains "आवश्यक धार्मिक प्रथाओं" (essential religious practices) सिद्धांत की पड़ताल करेगा; Interview दबाव डालेगा कि "क्या भारत धर्मनिरपेक्ष भी हो सकता है और उसके पास Hindu Code Bill भी हो सकता है?" इस इकाई पर महारत हासिल करना अनिवार्य है।

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