Important committees & commissions
Important committees & commissions — Sarkaria (1983) · Punchhi (2007) · Verma 2013 (women safety) · Lodha 2014 (cricket reforms) · Mukul Mudgal · Kothari 1986 (civil services) · ARC I & II · NCRWC
कहानी से शुरुआत
तारीख है 16 दिसंबर 2012, मुनिरका, दिल्ली। एक 23 वर्षीय फिजियोथेरेपी इंटर्न Life of Pi देखने के बाद अपने एक पुरुष मित्र के साथ एक निजी बस में चढ़ती है। अगले 65 मिनट में जो कुछ होता है वह इतना क्रूर है कि भारत की सामूहिक अंतरात्मा फट पड़ती है। Nirbhaya — प्रेस द्वारा दिया गया नाम — 13 दिन बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में दम तोड़ देती है। पूरा देश उबल पड़ता है। 23 दिसंबर 2012 तक गृह मंत्री एक समिति की घोषणा कर देते हैं। 23 जनवरी 2013 तक भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश Justice J.S. Verma मात्र 29 दिनों में एक 657-पृष्ठ की रिपोर्ट सौंप देते हैं — जो भारत के संवैधानिक इतिहास की सबसे तेज, सबसे व्यापक समिति रिपोर्टों में से एक है। 3 फरवरी 2013 तक Criminal Law (Amendment) Ordinance 2013 पर हस्ताक्षर हो जाते हैं। 2 अप्रैल 2013 तक Criminal Law (Amendment) Act 2013 को संसद की स्वीकृति मिल जाती है। भारत का यौन अपराध कानून फिर से लिखा जाता है।
समितियां यही कर सकती हैं जब देश सुनता है। अक्सर ऐसा नहीं होता — Sarkaria Commission 5 वर्षों (1983-1988) तक चला, NCRWC 2 वर्षों (2000-2002) तक, और इनकी अधिकांश सिफारिशें अलमारियों में पड़ी रहती हैं। Lodha Committee (BCCI सुधार, 2014-16) को गंभीरता से लिए जाने के लिए Supreme Court द्वारा लागू कराना पड़ा। Kothari Committee (1976) ने IAS परीक्षा का पुनर्गठन किया — इसका ढांचा 2026 में भी चल रहा है।
यह यूनिट भारत की सबसे कठिन सुधार समस्याओं — संघवाद, महिला सुरक्षा, खेल प्रशासन, सिविल सेवा, चुनावी सुधार, भ्रष्टाचार — पर पिछले सात दशकों में किसने विचार किया है, उसका नक्शा है। नाम ही सूचकांक हैं। रिपोर्टें ही पाठ्यपुस्तकें हैं। और कार्यान्वयन की खाई ही असली कहानी है।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
ये समितियां और आयोग Prelims की सोने की खान हैं — एकल-MCQ तथ्य (वर्ष, अध्यक्ष, विषय) साल में 2-3 बार आते हैं। Mains इन्हें हर सुधार उत्तर में साक्ष्य के रूप में प्रयोग करता है — संघवाद पर Sarkaria या Punchhi का, महिला सुरक्षा पर Verma का, खेल प्रशासन पर Lodha का उल्लेख। Interview बोर्ड नियमित रूप से पूछते हैं कि किस समिति ने किस विषय पर काम किया + कार्यान्वयन की खाई पर आपका दृष्टिकोण क्या है।
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