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भारतीय इतिहासप्रारंभिक: उच्चमुख्य परीक्षा: उच्चसाक्षात्कार: मध्यम10 मिनट में पढ़ेंअपडेट किया गया 2026-06-01

Revolutionary nationalism

Revolutionary nationalism · HRA · HSRA · INA · Bose

कहानी से शुरुआत

समय है 17 जनवरी 1941, आधी रात का सन्नाटा, 38/2 एल्गिन रोड, कलकत्ताSubhas Chandra Bose — जो 1939 में Congress अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने के बाद से अंग्रेज़ों की निगरानी में हैं — एक पठान के वेश में, "Mohammad Ziauddin" नाम धरकर अपने घर से चुपचाप निकल जाते हैं। 88 दिन की यात्रा — Peshawar → Kabul → Moscow → Berlin — के बाद वे 27 मार्च 1941 को जर्मन राजधानी पहुँचते हैं। Hitler का विदेश मंत्रालय उन्हें हैरानी के साथ स्वीकार करता है। Bose की योजना: Germany व Italy में मौजूद भारतीय युद्धबंदियों (POWs) को एक Indian Legion में संगठित कर जर्मन सेनाओं के साथ मिलकर भारत को आज़ाद कराना।

Berlin में 17 महीने बिताने के बाद Bose को एहसास होता है कि Germany भारत तक नहीं पहुँच सकता। वे पूर्वी एशिया भेजे जाने का अनुरोध करते हैं। फरवरी 1943 में एक जर्मन U-boat (U-180) उन्हें Kiel से ले जाती है; Madagascar के पास वे एक जापानी पनडुब्बी (I-29) में स्थानांतरित हो जाते हैं। जुलाई 1943 तक वे Tokyo में हैं। वे Captain Mohan Singh के पूर्ववर्ती प्रयासों से बनी Indian National Army (INA) का नेतृत्व अपने हाथ में ले लेते हैं।

21 अक्टूबर 1943 को, Singapore में, Bose Provisional Government of Free India (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की घोषणा करते हैं। नारा: "Tum Mujhe Khoon Do, Main Tumhe Azadi Doonga" (मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा)। भारतीय POWs + दक्षिण-पूर्व एशिया के भारतीय प्रवासियों को मिलाकर लगभग 50,000+ की मज़बूत INA, 1944 में Imphal + Kohima में कूच करती है। Bose की मुद्रा, डाक टिकट, महिला रेजिमेंट (Lakshmi Sahgal के नेतृत्व में Rani of Jhansi Regiment) और राजनयिक कूटनीति मिलकर पहली भारतीय-नेतृत्व वाली युद्धकालीन सरकार खड़ी करती हैं।

लेकिन 1945 के मध्य तक Japan ढह रहा है18 अगस्त 1945 को, Taihoku (Taipei), Taiwan में एक विमान दुर्घटना में Bose की मृत्यु हो जाती है — कई आधिकारिक जाँचों के अनुसार, यद्यपि उनके जीवित बच निकलने की धारणाएँ आज भी क़ायम हैं।

UPSC के लिए, Subhas Chandra Bose + INA + क्रांतिकारी राष्ट्रवाद स्वतंत्रता संग्राम पर खूब पूछा जाने वाला Mains GS-I विषय है।

UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की क्रांतिकारी धारा ने:

  • गांधीवादी अहिंसा को पूरक बनाते हुए सशस्त्र प्रतिरोध जोड़ा।
  • Bose की INA + Royal Indian Navy Mutiny 1946 अंग्रेज़ों के देश छोड़ने के निर्णय के प्रत्यक्ष उत्प्रेरक थे।
  • स्वतंत्रता-उपरांत राजनीतिक नेताओं की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया
  • समकालीन सांस्कृतिक प्रतीक — Netaji देशभक्तिपूर्ण बलिदान + सैन्य नेतृत्व के प्रतीक हैं।

UPSC के लिए:

  • Prelims: Bose की जीवनी-कालरेखा, INA की संरचना + प्रमुख युद्ध, Royal Indian Navy Mutiny 1946, HSRA + क्रांतिकारी समूह।
  • Mains GS-I: Bose की विचारधारा + Gandhi से तुलना, क्रांतिकारी धारा का योगदान, गांधी-पश्चात राष्ट्रवादी चिंतन।

यह फ़ाइल Subhas Chandra Bose के जीवन-वृत्त, INA की कार्यप्रणाली, क्रांतिकारी राष्ट्रवाद के पूर्ववर्ती (Bhagat Singh, HSRA), 1945-उपरांत मुक़दमों और विरासत को कवर करती है।

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