Integrity, impartiality, non-partisanship, objectivity
Integrity, impartiality, non-partisanship, objectivity
कहानी से शुरुआत
तारीख है 12 March 1990। तमिलनाडु कैडर के 1955-बैच के IAS अधिकारी T.N. Seshan ने अभी-अभी भारत के 10वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त (Chief Election Commissioner of India) के रूप में शपथ ली है। यह पद काफी हद तक औपचारिक (ceremonial) माना जाता था — उनके नौ पूर्ववर्तियों ने इसे सेवानिवृत्ति के बाद की एक आरामदायक कुर्सी मान रखा था। एक महीने के भीतर ही Seshan घोषणा करते हैं कि हर Returning Officer को अपनी संपत्ति की घोषणा (asset declaration) जमा करनी होगी, कि फर्जी मतदाता सूचियाँ साफ की जाएँगी, और कि विधिक सीमा से अधिक खर्च करने वाले उम्मीदवार अयोग्य घोषित कर दिए जाएँगे।
Congress और BJP दोनों के राजनेता उपहास उड़ाते हैं। 1994 तक Seshan कर चुके थे:
- 15 करोड़ (150 million) से अधिक फर्जी मतदाताओं की सफाई।
- सुरक्षा और सूचियों की सफाई के लिए 17 राज्यों में चुनाव स्थगित।
- खर्च के उल्लंघनों के लिए 40,000 उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित किया।
- EPIC मतदाता पहचान-पत्र (voter ID cards) अनिवार्य किए (यह परियोजना उनके उत्तराधिकारी M.S. Gill ने पूरी की)।
Supreme Court (1995) में निर्णय देता है कि CEC का कार्यकाल निश्चित है और उसे केवल महाभियोग (impeachment) द्वारा ही हटाया जा सकता है। Parliament संशोधन कर निर्वाचन आयोग को एक बहु-सदस्यीय निकाय (multi-member body) बना देती है (1993)। Seshan जिस संस्था की उन्होंने मात्र अध्यक्षता की थी, उसे रचकर (created) सेवानिवृत्त होते हैं। Rajeev Gandhi Foundation Award. Magsaysay Award (1996)। उनके तीन मूल्य: नियम के प्रति ईमानदार, दलों के पार निष्पक्ष, दबाव के समक्ष निर्भीक।
यही है integrity, impartiality और non-partisanship का संस्थागत (institutional) रूप। चौथा मूल्य — objectivity — को Seshan ने एक बार पाँच शब्दों में परिभाषित किया था: "What the file says, goes." (जो फ़ाइल कहती है, वही होगा।)
UPSC उम्मीदवार के लिए लोक सेवा के ये चार आधारभूत सद्गुण (foundational virtues) GS-IV में सबसे अधिक प्रयोगात्मक रूप से (operationally) परखा जाने वाला समूह हैं। ये हर परिस्थितिजन्य नैतिकता (situational ethics) के प्रश्न में, हर केस-स्टडी उत्तर में, हर साक्षात्कार के सवाल में आते हैं।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
सीधे तौर पर 2013, 2015, 2017, 2019, 2022, 2023, 2024 में इन कथनों के रूप में पूछा गया — "लोक सेवा में integrity, impartiality और objectivity की भूमिका पर चर्चा कीजिए"; "non-partisanship और political neutrality में अंतर बताइए"; "objectivity को नीति-निर्माण की आधारशिला (cornerstone) क्यों माना जाता है?" Prelims केवल GS-IV नहीं है, परंतु Interview बोर्ड इन चारों सद्गुणों को हर परिस्थितिजन्य प्रश्न के माध्यम से परखते हैं — "यदि कोई मंत्री आपसे उनकी जाति के पक्ष में निर्णय करने को कहे तो आप क्या करेंगे?" यह impartiality + non-partisanship की परीक्षा है।
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