Ozone depletion
Ozone depletion · Montreal Protocol · Kigali Amendment · ozone hole · CFCs & HFCs
कहानी से शुरुआत
1985 में, अंटार्कटिका के एक सुदूर स्टेशन पर तीन ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक ऐसा निष्कर्ष प्रकाशित किया जो इतना चौंकाने वाला था कि NASA को शुरू में लगा कि उसके अपने ही उपग्रह खराब हो गए हैं: दक्षिणी ध्रुव (South Pole) के ऊपर ओज़ोन परत में एक विशाल "छेद" (hole) खुल गया था। यह पतलापन इतना गंभीर था कि सुरक्षात्मक सॉफ़्टवेयर इन रीडिंग्स को स्वतः ही त्रुटियाँ (errors) मानकर हटा रहा था। इसका दोषी निकला "चमत्कारी" रसायनों का एक वर्ग — क्लोरोफ्लोरोकार्बन (chlorofluorocarbons, CFCs) — जो रेफ्रिजरेटरों, एयर कंडीशनरों, एयरोसॉल स्प्रे और फ़ोम में इस्तेमाल होता था। एक बार छोड़े जाने पर ये समताप मंडल (stratosphere) तक ऊपर पहुँच जाते थे, जहाँ पराबैंगनी प्रकाश (ultraviolet light) इन्हें तोड़ देता था और क्लोरीन परमाणु (chlorine atoms) मुक्त कर देता था, जो हज़ारों ओज़ोन अणुओं को नष्ट कर देते थे।
दुनिया की प्रतिक्रिया इतिहास की सबसे बड़ी पर्यावरणीय सफलता की कहानी बन गई। महज़ दो वर्षों में, राष्ट्रों ने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (Montreal Protocol, 1987) पर हस्ताक्षर किए — पृथ्वी का हर एक देश जिसका अनुसमर्थन (ratify) करने वाली एकमात्र UN संधि — और CFCs को चरणबद्ध रूप से हटाना (phase out) शुरू किया। यह कारगर रहा। ओज़ोन परत अब ठीक हो रही है (healing), और इसी सदी के मध्य तक पूरी तरह उबरने की राह पर है।
लेकिन इसमें एक मोड़ था। CFCs की जगह लेने वाले रसायन — HFCs (हाइड्रोफ्लोरोकार्बन, hydrofluorocarbons) — ओज़ोन परत के लिए तो हानिरहित थे लेकिन वे अत्यंत शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें निकलीं, जो वैश्विक तापन (global warming) के लिए CO₂ से हज़ारों गुना ज़्यादा ख़तरनाक थीं। इसलिए 2016 में, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल फिर से विकसित हुआ, किगाली संशोधन (Kigali Amendment) के साथ, ताकि इन्हें भी चरणबद्ध रूप से घटाया (phase down) जा सके। ओज़ोन परत की कहानी वह दुर्लभ उदाहरण है जहाँ दुनिया ने एक ग्रहीय ख़तरे को देखा, निर्णायक रूप से कार्रवाई की — और जीत हासिल की।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
एक भरोसेमंद Prelims स्कोरर और सफल अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणीय सहयोग का एक पसंदीदा Mains/interview उदाहरण। Prelims में Vienna Convention बनाम Montreal Protocol, ODS (CFCs/halons), किगाली संशोधन (HFCs), ओज़ोन छेद (ozone hole) और Dobson Units पूछे जाते हैं। Mains और interviews में Montreal को "जलवायु संधि को कैसे कारगर बनाएँ" के टेम्पलेट के रूप में प्रयोग किया जाता है (धीमे UNFCCC के विपरीत)। यह प्रदूषण, वायुमंडल और जलवायु नीति को आपस में जोड़ता है।
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