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CSAT — तर्कशक्ति एवं बोधप्रारंभिक: उच्चमुख्य परीक्षा: मध्यमसाक्षात्कार: मध्यम

Strengthen-weaken arguments

Strengthen-weaken arguments

13 मिनट में पढ़ें · अपडेट किया गया 2026-06-01

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मज़बूत तर्क क्या है?

मज़बूत तर्क वह है जो कथन से सीधे संबंधित हो, सत्यापन-योग्य आँकड़ों या नज़ीर पर टिका हो, व्यावहारिक हो और आलंकारिक न होकर सारगर्भित हो; इनमें से एक भी कसौटी चूकने पर तर्क कमज़ोर हो जाता है। कमज़ोर रूपों में हैं प्राधिकार या भावना की दुहाई, व्यक्ति पर हमला, बिना आधार का फिसलन-ढाल, झूठी उपमा, जल्दबाज़ी का सामान्यीकरण और प्रश्न को ही मान लेना। प्रमाण का भार प्रस्तावक पर होता है।

कहानी

"कथन: भारत के सभी बड़े शहरों को तुरंत डीज़ल वाहनों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए। निम्नलिखित में से कौन-सा तर्क सशक्त (strong) है? (I) हाँ — डीज़ल उत्सर्जन से बच्चों में अस्थमा होता है। (II) नहीं — डीज़ल टैक्सियाँ लाखों ड्राइवरों की आजीविका हैं।"

भोला अभ्यर्थी (I) चुन लेता है — क्योंकि "डीज़ल बुरा है"। पर सशक्त/दुर्बल तर्क इस तरह काम नहीं करते।

एक सशक्त तर्क (strong argument) को एक साथ तीन काम करने होते हैं:

  1. कथन से सीधे प्रासंगिक (directly relevant) हो।
  2. किसी वस्तुनिष्ठ, सत्यापन-योग्य आधार (आँकड़े, पूर्ववर्ती उदाहरण, कार्य-कारण तंत्र) द्वारा समर्थित हो।
  3. व्यावहारिकता (practicality) को संबोधित करे — यदि नीति का पालन हो या न हो तो क्या होगा।

तर्क (I) एक सत्यापित कार्य-कारण तंत्र देता है (उत्सर्जन → अस्थमा) → सशक्त। तर्क (II) एक वास्तविक चिंता उठाता है पर यह संबोधित नहीं करता कि प्रतिबंध उचित (justifiable) है या नहीं — केवल असुविधाजनक है। अकेली असुविधा कोई सशक्त प्रति-तर्क नहीं है; प्रमाण का भार (burden of proof) इस पर स्थानांतरित हो जाता है कि क्या असुविधा, हानि से अधिक भारी है। अतः (II) जिस रूप में कहा गया है, उसमें दुर्बल है।

दोनों (Both) वास्तविक CSAT में अधिक आम सही उत्तर होता है — क्योंकि वास्तविक नीतिगत बहसों में हमेशा दोनों पक्षों में सशक्त तर्क होते हैं। "क्रिटिकल रीज़निंग" का CSAT संस्करण अभ्यर्थी को इस बात का पहला स्वाद देता है कि GS-IV नैतिकता क्या माँगेगी।

यह यूनिट सिखाती है: सशक्त बनाम दुर्बल तर्कों की 4-नियम जाँच, कार्य-कारण वर्गीकारक (classifier), अभिधारणा (assumption) जाँच, और "course of action" ढाँचा।

UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

CSAT के लिए (Paper II, अर्हक 33%):

  • क्रिटिकल रीज़निंग पर प्रति पेपर 2-5 प्रश्न। 2014 से लगातार बढ़ते हुए — UPSC तथ्यात्मक नहीं, बल्कि अनुमान-आधारित (inferential) प्रश्नों की ओर बढ़ रहा है।
  • ये प्रश्न वास्तविक Mains/Interview की सोच को सबसे निकट से प्रतिबिंबित करते हैं — तर्क की गुणवत्ता, अभिधारणा-पहचान, कार्य-कारण तर्कशास्त्र।
  • CSAT में सर्वोच्च विश्लेषणात्मक मानक। अन्य खंड गति का परीक्षण करते हैं; यह खंड कठोरता (rigor) का परीक्षण करता है।

Mains GS-IV (Ethics) और Mains GS-II (Polity) के लिए — यही कौशल उत्तर-लेखन की रणनीति बन जाता है। जो अभ्यर्थी CSAT में किसी दुर्बल तर्क को पहचान सकता है, वह सशक्त Mains उत्तर लिखेगा।

Interview के लिए, बोर्ड स्पष्ट रूप से सशक्त/दुर्बल तर्कों की जाँच करते हैं: "आपकी स्थिति के विरुद्ध सबसे सशक्त तर्क क्या है?" यदि आप एक नहीं गढ़ सकते, तो बोर्ड यह निष्कर्ष निकालता है कि आपने मुद्दे पर भली-भाँति सोचा ही नहीं है।