Pottery traditions
Pottery traditions — Khurja, Khanapur, terracotta, blue pottery of Jaipur
कहानी से शुरुआत
समय है 3000 BCE, मोहनजोदड़ो शहर (city of Mohenjo-daro)। हड़प्पावासियों (Harappans) ने अभी-अभी एक मिट्टी के बर्तन को भट्ठी में ~1000°C पर पकाया है। यह बर्तन चमकदार पॉलिश वाली काली सतह लिए हुए है, जिस पर लाल स्लिप (red slip) पर काले रंग से पीपल के पत्ते (peepal leaves) और आपस में काटते वृत्त (intersecting circles) चित्रित हैं। इसका आकार ज्यामितीय रूप से सटीक है — मिट्टी को दुनिया के पहले सच्चे कुम्हार के चाक (potter's wheel) पर ढाला गया है। यह बर्तन अपने शहर से 4,500 वर्ष अधिक टिकेगा; 1924 में पुरातत्वविद् (archaeologists) इसे खंडहरों से निकालकर कराची संग्रहालय (Karachi Museum) में रखेंगे।
अब आगे बढ़ें आज, UP के बुलंदशहर (Bulandshahr) जिले के खुर्जा (Khurja) गाँव की ओर। आठ भट्ठियाँ एक साथ जल रही हैं। हर एक में ~2,000 टुकड़े समाते हैं। भट्ठी-प्रमुख (kiln-master) देखता है कि लपटों का रंग ~1180°C पर पीले से नीला हो रहा है — यही भट्ठी को बंद करने का सटीक क्षण है। अंदर, ग्लेज़्ड खुर्जा पॉटरी (glazed Khurja pottery) अपना विशिष्ट नीला + हरा + भूरा पुष्प पैटर्न ले रही है, जिसे lead oxide + cobalt + copper द्वारा स्थिर किया गया है। भट्ठी 36 घंटे तक जलेगी। कल भट्ठी-प्रमुख का परिवार सोएगा; आज वे नहीं सोते।
भारतीय पॉटरी उपमहाद्वीप का सबसे पुराना सतत चलने वाला शिल्प है। हड़प्पाई लाल-और-काले बर्तन (Harappan red-and-black ware)। मौर्यकाल का उत्तरी काली पॉलिश वाला बर्तन (Northern Black Polished Ware, NBPW)। तमिलनाडु के अय्यनार (Aiyyanar) मंदिरों के टेराकोटा घोड़े। ईरान से मंगोल कारीगरों द्वारा लाई गई जयपुर की ब्लू पॉटरी (blue pottery of Jaipur)। खुर्जा की ग्लेज़्ड फ़ैक्ट्री पॉटरी। भारतीय इतिहास की हर परत ने मिट्टी में अपना अभिलेख छोड़ा।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
पॉटरी अधिकांश Prelims वर्षों में पूछी जाती है — या तो "शिल्प को क्षेत्र से मिलाओ" (Khurja, Blue Pottery, Black Pottery) के रूप में, या "हड़प्पा-कालीन पुरातत्व" (red-and-black ware, NBPW) के रूप में। Mains GS-I इसे समय-समय पर कारीगर-आजीविका + GI + विरासत के पहलुओं से छूता है। Interview बोर्डों को पॉटरी के प्रश्न पसंद हैं क्योंकि वे पुरातत्व + शिल्प + आजीविका + GI अर्थव्यवस्था को जोड़ते हैं। छह भारतीय पॉटरी परंपराओं के पास GI tags हैं; पॉटरी ~1.2 million भारतीयों को रोज़गार देती है।
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