Colonial & post-colonial Indian architecture
Colonial & post-colonial Indian architecture
कहानी से शुरुआत
तारीख है 23 दिसंबर 1911। King George V ने अभी-अभी अपनी Delhi Durbar घोषणा की है — ब्रिटिश राजधानी को Calcutta से हटाकर Old Delhi के दक्षिण में बसाई जाने वाली एक नई नगरी में स्थानांतरित किया जाएगा। ब्रिटिश वास्तुकार Sir Edwin Lutyens और Sir Herbert Baker को एक बंद-कमरे की प्रतियोगिता के लिए बुलाया जाता है। आदेश (brief) यह था: ब्रिटिश भारत की साम्राज्यिक राजधानी (imperial capital) की रूपरेखा बनाएँ — वायसराय का महल, सचिवालय भवन (secretariat blocks), शोभायात्रा का अक्ष (processional axis), और औपचारिक राजमार्ग (ceremonial avenue)। बजट असीमित था। राजनीतिक दाँव पर सब कुछ लगा था।
अगले बीस वर्षों में जो उभरकर सामने आया वह था Lutyens' Delhi — एक 26 वर्ग किलोमीटर की साम्राज्यिक नगरी जिसका केंद्र-बिंदु था Raisina Hill के शिखर पर स्थित Rashtrapati Bhavan (तब Viceroy's House), जिसके दोनों ओर Baker के दो Secretariat blocks थे, जो Parliament House (Baker, 1927) की धनुषाकार वक्र (bow-curve) से जुड़ा था, और 3-km के Rajpath / Kartavya Path द्वारा India Gate (Lutyens, 1931) से जुड़ा था। यहाँ की वास्तुकला की भाषा एक सोची-समझी संकर (hybrid) थी: शास्त्रीय यूरोपीय अनुपात को भारतीय Mughal और Buddhist अभिप्रायों (motifs) के साथ समाहित किया गया (Rashtrapati Bhavan का गुंबद स्पष्ट रूप से Sanchi Stupa पर आधारित)। 10 फरवरी 1931 को उद्घाटित, यह राजधानी सोलह वर्षों तक ब्रिटिश सत्ता का केंद्र रही और फिर अगस्त 1947 में स्वतंत्र भारत की सरकार का केंद्र बन गई — एक ऐसी नियति जिसकी Lutyens और Baker ने योजना नहीं बनाई थी।
औपनिवेशिक वास्तुकला की यह विरासत जटिल और विवादित है। यह वे भवन हैं जिनमें हम काम करते हैं — Parliament, अदालतें, विश्वविद्यालय, रेलवे स्टेशन। यह वे भवन हैं जिनके पास से हम गुज़रते हैं — Victoria Terminus, Gateway of India, Madras High Court। और यह वह स्वतंत्रता-पश्चात प्रतिक्रिया है — Chandigarh का Le Corbusier आधुनिकतावाद (modernism), IIT Kanpur का brutalism, Charles Correa का क्षेत्रीय आधुनिकतावाद, और B.V. Doshi का देशज मानवतावाद (vernacular humanism)। इस 160-वर्षीय चाप (arc) को समझना ही समकालीन शहरी भारत की दृश्य बनावट को समझना है।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
औपनिवेशिक और स्वतंत्रता-पश्चात वास्तुकला Prelims में हर 2-3 वर्ष में एक बार आती है — वास्तुकार की पहचान (Lutyens, Baker, Le Corbusier, Correa, Doshi), भवन-शैली का वर्गीकरण (Indo-Saracenic बनाम Neo-Classical बनाम Modern), और पुरस्कार-स्मरण (2018 में Doshi को Pritzker)। Mains इसका उपयोग "शैलियों के समन्वय (syncretism of styles)", "स्वतंत्रता-पश्चात राष्ट्र-निर्माण (post-colonial nation-building)" या "आधुनिक धरोहर (modern heritage)" प्रश्नों के लिए करता है। Interview बोर्ड इससे धरोहर-बनाम-विकास (heritage-vs-development) के समझौतों और Pritzker पुरस्कार के संदर्भ की जाँच करते हैं।
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