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कृषिप्रारंभिक: उच्चमुख्य परीक्षा: उच्चसाक्षात्कार: मध्यम12 मिनट में पढ़ेंअपडेट किया गया 2026-06-02

GM crops

GM crops · Bt Cotton · Bt Brinjal · GEAC

त्वरित उत्तर

Bt cotton भारत में व्यावसायिक खेती के लिए अनुमोदित एकमात्र आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) फसल है, जिसे Genetic Engineering Appraisal Committee ने March 2002 में मंज़ूरी दी और जो कपास क्षेत्र के लगभग 95 प्रतिशत पर उगाई जाती है। GM अनुमोदन Environment Protection Act 1986 तथा EPA Rules 1989 के तहत होते हैं। Bt brinjal पर 9 February 2010 से moratorium है; GM mustard DMH-11 को केवल पर्यावरणीय रिलीज़ मिली है, 25 October 2022 को।

कहानी से शुरुआत

26 मार्च 2002 को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत Genetic Engineering Approval Committee (GEAC) ने Mahyco-Monsanto Biotech (MMB) के तीन Bt cotton hybrids — MECH-12, MECH-162 और MECH-184 — को मंज़ूरी दी। भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा Bt cotton अपनाने वाला देश बन गया। 2003-04 तक Bt cotton ~50,000 हेक्टेयर में फैल चुकी थी; 2014-15 आते-आते भारत के 12 मिलियन हेक्टेयर कपास क्षेत्र का ~95% Bt cotton से ढक गया। कपास उत्पादन 130 लाख गांठ (1999-2000) से तीन गुना बढ़कर 398 लाख गांठ (2013-14) तक पहुँच गया। कपास निर्यात $7.5 बिलियन तक उछल गया। कपास पर कीटनाशकों का उपयोग 65% घट गया।

छह वर्ष बाद 14 अक्टूबर 2009 को उसी GEAC ने Mahyco, UAS Dharwad और TNAU Coimbatore द्वारा विकसित Bt Brinjal के व्यावसायीकरण की सिफारिश की। बारह दिन बाद 17 राज्यों (सभी प्रमुख बैंगन उत्पादक राज्यों सहित) ने पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश को पत्र लिखकर विरोध जताया। पूरे भारत में सात सार्वजनिक परामर्शों के बाद रमेश ने 9 फरवरी 2010 को अनिश्चितकालीन रोक (moratorium) लगा दी। भारत किसी पूरी तरह अनुमोदित GM खाद्य फसल को उपभोक्ता-सुरक्षा चरण में रोकने वाला पहला देश बन गया। यह मामला आज भी अनसुलझा है।

फिर 25 अक्टूबर 2022 को GEAC ने GM Mustard (DMH-11) के पर्यावरणीय रिलीज़ को मंज़ूरी दी — जिसे दिल्ली विश्वविद्यालय में Dr Deepak Pental ने सार्वजनिक वित्त पोषण से विकसित किया था। इस बार सर्वोच्च न्यायालय हस्तक्षेप करता है; जुलाई 2024 में विभाजित पीठ ने किसी भी व्यावसायिक रिलीज़ से पहले केंद्र को राष्ट्रीय GM नीति बनाने को कहा।

GM तकनीक अधिक उपज + कम कीटनाशक उपयोग + जलवायु-प्रतिरोधी किस्मों का वादा करती है। इसके साथ ही उपभोक्ता-सुरक्षा, पारिस्थितिकी और किसान-निर्भरता की चिंताएँ भी उठती हैं। भारतीय कृषि में कुछ ही विषय इतने राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं।

UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

GS-III में कृषि में जैव-प्रौद्योगिकी, GEAC की भूमिका, Bt cotton का इतिहास + किसान आत्महत्या की बहस, Bt Brinjal moratorium, GM Mustard DMH-11 प्रकरण, नियामक ढाँचा (Environment Protection Act + Rules 1989) तथा वैश्विक तुलना परीक्षित होती है। Prelims में GEAC की संरचना (2017), Bt cotton (2018), GM Mustard (2023) और Cartagena Protocol (2017) से प्रश्न आ चुके हैं। Mains में GM नीति के मूल्यांकन पर नियमित रूप से प्रश्न पूछे जाते हैं।

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