Climate-smart agriculture
Climate-smart agriculture · zero budget natural farming · ZBNF · agroecology
कहानी से शुरुआत
2 फरवरी 2019 की सुबह, लोकसभा में। वित्त मंत्री Piyush Goyal FY 2019-20 का अंतरिम बजट प्रस्तुत करते हुए एक अजीब घोषणा करते हैं: भारत Zero Budget Natural Farming (ZBNF) को बड़े पैमाने पर अपनाएगा। यह शब्द, जो अब तक कृषि अर्थशास्त्रियों के एक छोटे से वर्ग तक सीमित था, राष्ट्रीय नीति शब्दावली बन जाता है। ZBNF के प्रणेता — विदर्भ के 70 वर्षीय Padma Shri प्राप्तकर्ता Subhash Palekar — अचानक संसद, Niti Aayog रिपोर्टों और अंतर्राष्ट्रीय FAO सम्मेलनों में उद्धृत होने लगते हैं।
लेकिन ZBNF की सबसे महत्वाकांक्षी तैनाती दो साल पहले आंध्र प्रदेश में शुरू हो चुकी थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री Chandrababu Naidu ने Vijay Kumar T. को — एक दृढ़निश्चयी IAS अधिकारी जिन्हें Self-Help Groups का अनुभव था — Rythu Sadhikara Samstha (RySS) चलाने के लिए नियुक्त किया: एक राज्यव्यापी किसान सशक्तीकरण कार्यक्रम जो 2024 तक 60 लाख हेक्टेयर में 80 लाख किसानों को Andhra Pradesh Community-managed Natural Farming (APCNF) की ओर ले जाएगा। पाँच साल बाद, 1.8 लाख गाँवों में 6 लाख किसान आंध्र प्रदेश में प्राकृतिक खेती कर रहे थे। Centre for Sustainable Agriculture के 2022 के मूल्यांकन में पाया गया कि इनपुट लागत 45-60% गिरी, मृदा जैविक कार्बन (soil organic carbon) 0.3% से 0.5-0.7% तक बढ़ा, और जल की आवश्यकता 35% कम हुई।
इसी बीच, 2024 IPCC AR6 Synthesis Report ने भारत के लिए एक कड़ी चेतावनी दी: 2050 तक गेहूँ उपज में 6-23% और चावल उपज में 4-15% की गिरावट होगी — बिना जलवायु अनुकूलन के। हरित क्रांति (Green Revolution) का पैकेज — उच्च उपज बीज + रासायनिक उर्वरक + नहर जल — जिसने 1960 के दशक में अकाल टाला था, पर्यावरणीय सीमाओं पर पहुँच रहा था: पंजाब में भूजल स्तर 50 सेमी/वर्ष गिर रहा था; 41% भारतीय मृदाओं में मृदा जैविक कार्बन 0.5% से नीचे; नाइट्रोजन-उपयोग दक्षता मात्र 30% (अर्थात् 70% उर्वरक मृदा, जल, वायुमंडल में नष्ट)।
जलवायु-स्मार्ट कृषि, ZBNF, कृषि पारिस्थितिकी (agroecology) — ये हरित क्रांति-पूर्व अतीत में रोमांटिक वापसी नहीं हैं। ये 1.5°C-2°C गर्म भारत के लिए व्यावहारिक अनुकूलन हैं जहाँ मानसून अधिक अनिश्चित और भूजल घटता जा रहा है। UPSC के लिए यह अपने सबसे समकालीन रूप में GS-III है।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
जलवायु-स्मार्ट कृषि दो प्रमुख Mains विषयों के संगम पर है — सतत कृषि (2019, 2021, 2022, 2024 में पूछा गया) और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन (प्रतिवर्ष पूछा जाता है)। Prelims में विशिष्ट योजनाओं (PKVY, BPKP, MOVCDNER, ZBNF), तकनीकों (mulching, jeevamruta, beejamruta) और निकायों (ICAR-NAARM, NABARD, NCONF) की परीक्षा होती है। Interview बोर्ड "क्या ZBNF स्केल कर सकता है?" और "क्या प्राकृतिक खेती खाद्य सुरक्षा के अनुकूल है?" जैसे प्रश्न पूछते हैं।
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