Tropical cyclones
Tropical cyclones · formation · eye & eyewall · storm surge · hurricane/typhoon/cyclone · naming · intensity scales
कहानी से शुरुआत
12 अक्टूबर 2013 की सुबह, भारतीय मौसम विभाग (Indian Meteorological Department) ने चेतावनी जारी की कि Cyclone Phailin — आधे भारत के आकार जितना विशाल तंत्र, जिसकी साफ़, भयावह आँख (eye) अंतरिक्ष से दिखाई दे रही थी — भारत में अब तक टकराने वाले सबसे शक्तिशाली तूफ़ानों में से एक के रूप में Odisha तट से टकराएगा। 1999 में, इसी राज्य में एक ऐसे ही super cyclone ने लगभग 10,000 लोगों की जान ली थी। इस बार, सरकार ने 48 घंटों में लगभग दस लाख लोगों को निकाला (evacuate)। जब Phailin ने 200 km/h से अधिक की हवाओं के साथ तट पर दस्तक दी, तो मृतकों की संख्या 50 से कम थी। संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने इसे "आपदा प्रबंधन में एक ऐतिहासिक सफलता (a landmark success in disaster management)" कहा।
1999 और 2013 के बीच का अंतर तूफ़ान नहीं था — यह विज्ञान (science) था। अब हम ठीक-ठीक समझते हैं कि एक उष्णकटिबंधीय चक्रवात (tropical cyclone) क्या है: एक विशाल, घूमता हुआ ऊष्मा इंजन (heat engine) जो अपनी ऊर्जा गर्म उष्णकटिबंधीय समुद्रों से खींचता है, एक शांत आँख (eye) के चारों ओर स्वयं को व्यवस्थित करता है, और अपना प्रकोप eyewall में तथा पानी की घातक दीवार, जिसे storm surge कहते हैं, के रूप में बरपाता है।
यही दानव अलग-अलग महासागरों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है — Atlantic में hurricane, पश्चिमी Pacific में typhoon, और हिंद महासागर (Indian Ocean) में cyclone — लेकिन भौतिकी एक समान है, और ख़तरा भी। जैसे-जैसे महासागर गर्म होते हैं, ये तूफ़ान तेज़ी से अधिक प्रबल (intensifying faster) होते जा रहे हैं और अधिक वर्षा ला रहे हैं, जिससे उष्णकटिबंधीय चक्रवात जलवायु-परिवर्तन वाली इस सदी के प्रमुख ख़तरों में से एक बन गए हैं।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
एक सदाबहार, उच्च-प्रतिफल (high-yield) GS-I (भौतिक भूगोल) और GS-III (आपदा प्रबंधन) विषय। Prelims को इसकी निर्माण की शर्तें (formation conditions), क्षेत्रीय नाम (regional names) (hurricane/typhoon/cyclone), संरचना (structure) (eye/eyewall), IMD तीव्रता वर्गीकरण (intensity classification), और चक्रवात नामकरण (cyclone naming) बहुत पसंद हैं। Mains इसे जलवायु परिवर्तन (climate change) (तीव्र प्रबलन/ rapid intensification, गर्म होता Arabian Sea) और आपदा तैयारी (disaster preparedness) (Phailin/Fani निकासी मॉडल) के साथ जोड़ता है। यह एक ही तूफ़ान तंत्र में समुद्र-विज्ञान (oceanography), जलवायु-विज्ञान (climatology) और आपदा प्रबंधन को जोड़ता है।
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