India in global mega-science
India in global mega-science · LIGO-India · CERN · ITER · SKA · India-based Neutrino Observatory
कहानी से शुरुआत
14 September 2015 को मानवता ने पहली बार ब्रह्मांड को सुना। संयुक्त राज्य अमेरिका में दो विशालकाय डिटेक्टर — LIGO प्रयोग का हिस्सा — एक मद्धम चहचहाहट (chirp) पकड़ पाए: ये थीं 1.3 billion light-years दूर टकराते दो ब्लैक होल से उठीं गुरुत्वीय तरंगें (gravitational waves) — स्पेसटाइम (spacetime) में एक ऐसी लहर जिसकी भविष्यवाणी Einstein ने एक सदी पहले की थी। इस खोज को 2016 Nobel Prize मिला — और इसके डेटा विश्लेषण में भारतीय वैज्ञानिक भी बुने हुए थे। भारत इस विज्ञान में एक साझेदार रहा था। अब वह अपना खुद का डिटेक्टर बना रहा है: LIGO-India, जो Hingoli, Maharashtra के खेतों में आकार ले रहा है, जिससे खगोलविद आकाश में इन ब्रह्मांडीय लहरों के स्रोत का triangulate (त्रिकोणन से ठीक-ठीक स्थान-निर्धारण) कर सकेंगे।
कुछ प्रश्न किसी एक राष्ट्र के लिए बस बहुत बड़े और बहुत महँगे होते हैं। ब्रह्मांड किस चीज़ से बना है? पदार्थ कैसे बना? क्या हम Sun के संलयन (fusion) को पृथ्वी पर फिर से रच सकते हैं? इनका उत्तर देने के लिए करोड़ों-अरबों डॉलर लागत वाली मशीनें चाहिए — विशाल दूरबीनें, कण-त्वरक (particle colliders), संलयन रिएक्टर। इसलिए दुनिया की वैज्ञानिक शक्तियाँ mega-science सहयोगों में धन, बुद्धि और इंजीनियरिंग एकत्रित करती हैं। भारत ने धीरे-धीरे उच्च मेज़ पर अपनी जगह बनाई है: CERN, ITER, Square Kilometre Array, Thirty Meter Telescope का साझेदार, और LIGO-India का मेज़बान।
ये परियोजनाएँ केवल प्रतिष्ठा (prestige) की बात नहीं हैं। ये भारतीय उद्योग में विश्वस्तरीय उपकरण-निर्माण कौशल (instrumentation skills) बनाती हैं, शोधकर्ताओं की एक पीढ़ी को प्रशिक्षित करती हैं, और भारत को विज्ञान की कूटनीति (diplomacy of science) में एक सीट देती हैं। Mega-science वह जगह है जहाँ भारत की वैज्ञानिक महत्वाकांक्षा उसकी soft power से मिलती है।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह एक लगातार पूछा जाने वाला GS-III विषय है (उपलब्धियाँ, अंतरराष्ट्रीय S&T सहयोग) जिसमें GS-II (विज्ञान कूटनीति) का कोण भी है। Prelims में LIGO-India, भारत की CERN और ITER भूमिकाएँ, SKA, Thirty Meter Telescope, और अटकी हुई India-based Neutrino Observatory (INO) पूछी जाती हैं। Mains और साक्षात्कार इसका उपयोग विज्ञान कूटनीति, स्वदेशी उपकरण-निर्माण, और big-science के अप्रत्यक्ष लाभ (spillovers) के लिए करते हैं। यह अंतरिक्ष और परमाणु विषयों का पूरक है।
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