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वैकल्पिक विषय — भूगोलप्रारंभिक: कममुख्य परीक्षा: उच्चसाक्षात्कार: मध्यम25 मिनट में पढ़ेंअपडेट किया गया 2026-06-02

Paper II

Paper II — Resources of India

कहानी से शुरुआत

दिसम्बर 2024 में, Geological Survey of India के हैदराबाद कार्यालय में एक भूवैज्ञानिक ने चुपचाप एक प्रेस विज्ञप्ति अपलोड की — और कुछ ही घंटों में यह खबर अंतर्राष्ट्रीय सुर्खियाँ बन गई: Pir Panjal की दक्षिणी ढलान पर स्थित जम्मू-कश्मीर के Reasi जिले में lithium oxide का अनुमानित (inferred) भंडार 5.9 million tonnes है — जो भारत में अब तक रिपोर्ट की गई सबसे बड़ी lithium उपलब्धता में से एक है। अड़तालीस घंटों के भीतर, Ministry of Mines ने Reasi ब्लॉक को critical mineral auctions के पहले बैच में शामिल कर लिया। जब तक नीलामी की बोलियाँ बंद हुईं, रणनीतिक परिणाम राष्ट्रीय समाचार बन चुके थे: भारत अपनी 100% lithium आयात-निर्भरता तोड़ने की स्थिति में आ गया था, जिसकी कीमत देश को तब तक बैटरी और EV आयात पर ₹24,000 करोड़ प्रतिवर्ष चुकानी पड़ती थी।

उस एकल प्रेस विज्ञप्ति ने संसाधन भूगोल के सार को पूरी तरह उजागर कर दिया। कोई संसाधन केवल वह नहीं है जो प्रकृति ने भूमि के नीचे रखा है — यह वह है जिसे प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था और नीति मिलकर एक "तटस्थ पदार्थ" से "संसाधन" में परिवर्तित करती हैंErich Zimmermann ने 1933 में यही कहा था: "Resources are not, they become." (संसाधन होते नहीं, बनते हैं।) भारत के संसाधनों ने ठीक इसी पथ का अनुसरण किया है। Singhbhum copper belt की "खोज" तभी हुई जब भारतीय उद्योगों को copper rod की जरूरत पड़ी। Mumbai High oil तब मिला जब ONGC ने 1974 में अपतटीय (offshore) खुदाई की। Reasi lithium 2,000 million वर्षों से चट्टान में विद्यमान था — लेकिन "संसाधन" तभी बना जब भारत ने electric mobility के प्रति प्रतिबद्धता जताई।

UPSC Geography Optional Paper II आपसे भारत के संसाधनों को तीन स्तरों पर समझने की अपेक्षा रखता है: (a) वर्गीकरण और सूचीकरण (classification and inventory), (b) क्षेत्रीय वितरण (regional distribution), (c) संरक्षण और नीति (conservation and policy)। यह फ़ाइल आपको तीनों स्तर देती है — 2024-25 के नवीनतम आँकड़ों, GSI सर्वेक्षणों, NITI Aayog critical minerals list और Mineral Conservation and Development Rules के अद्यतनों (updates) के साथ।

UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

UPSC Geography Optional Paper II के Section A में 2014 से प्रत्येक वर्ष संसाधनों पर लगभग निश्चित रूप से एक 15 अंक का प्रश्न पूछा जाता है — खनिज, ऊर्जा, जल, मृदा या समुद्री। Mains GS-I और GS-III भी कृषि, उद्योग, पर्यावरण और सुरक्षा से जुड़े प्रश्नों में resource geography का भरपूर उपयोग करते हैं। इस अध्याय में दक्षता हासिल करने से आप एक ही बैठक में optional + GS मिलाकर कम से कम 30 अंक के लिए खुद को तैयार कर लेते हैं। संसाधन viva के लिए भी अत्यंत उपयोगी हैं — बोर्ड नियमित रूप से lithium, rare earths, कोयले के phase-out और Sagarmala के बारे में पूछते हैं।

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