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आंतरिक सुरक्षाप्रारंभिक: मध्यममुख्य परीक्षा: उच्चसाक्षात्कार: उच्च12 मिनट में पढ़ेंअपडेट किया गया 2026-06-01

Linkages between development and spread of extremism

Linkages between development and spread of extremism

कहानी से शुरुआत

समय है मार्च 2014। Planning Commission के शोधकर्ताओं की एक टीम झारखंड के West Singhbhum स्थित Saranda forest से गुज़रती है — 4,500 वर्ग किमी घने साल वृक्षों की छतरी, एशिया के सबसे बड़े साल वनों में से एक, और 2011 तक CPI (Maoist) Eastern Regional Bureau का मुख्यालय। टीम Saranda Action Plan का दस्तावेज़ीकरण कर रही है, जिसे 2011 में सुरक्षा बलों द्वारा क्षेत्र को Operation Anaconda (August 2011) में साफ़ करने के बाद शुरू किया गया था।

निष्कर्ष चौंकाने वाले हैं। 56 गाँव, 7,000+ परिवार, 76% बच्चे नाटे (stunted), 64% महिलाएँ रक्ताल्पता (anaemic) से ग्रस्त, साक्षरता 23% (राष्ट्रीय 74% की तुलना में)। 30 किमी के दायरे में कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं। निकटतम बैंक — 45 किमी दूर। एकमात्र सड़क, 2012 तक, एक माओवादी-नियंत्रित कच्चा रास्ता थी। उनके पैरों के नीचे 22 लाख करोड़ रुपये मूल्य का लौह अयस्क (iron ore) — Bailadila-स्तर का अयस्क जो Tata + SAIL को पोषित करता है। भुगतान की गई royalties: अधिकतर राज्य को, अधिकतर अन्यत्र मोड़ दी गई, अधिकतर इन ग्रामीणों तक नहीं पहुँची। इन आदिवासियों के "स्वामित्व" वाली वन भूमि पीढ़ियों से जोती जा रही है — पर भूमि के अधिकार-पत्र (title deeds): शून्य।

यह है विकास-उग्रवाद गठजोड़ (development-extremism nexus) का मूर्त रूप। Planning Commission द्वारा गठित Expert Group on Development Challenges in Extremist-Affected Areas (D. Bandyopadhyay Committee, 2008) ने इसे स्पष्ट रूप से रखा था: "LWE मूलतः वंचितों का एक आंदोलन है, जिसके गहरे सामाजिक-आर्थिक कारण हैं — कोई वैचारिक विचलन नहीं।" समिति ने 6 मूल चालकों की पहचान की: भूमि बेदखली (land alienation), विस्थापन (displacement), वन से बेदखली (forest dispossession), शासन शून्यता (governance vacuum), आजीविका संकट (livelihood crisis), पहचान का अपमान (identity humiliation)

UPSC के लिए, विकास और उग्रवाद के बीच का यह संबंध GS-III आंतरिक सुरक्षा का सबसे विश्लेषणात्मक उप-विषय है। परीक्षक यह जाँचते हैं कि क्या आप समझते हैं कि अकेली सुरक्षा उग्रवाद को समाप्त नहीं कर सकती — और यह कि अधिकारों के बिना विकास भी ऐसा नहीं कर सकता

UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह Mains GS-III के लिए एक आधारभूत विश्लेषणात्मक अध्याय है — 2013, 2015, 2018, 2020, 2022 में भिन्न-भिन्न ढाँचों में पूछा गया। Prelims शायद ही कभी प्रत्यक्ष प्रश्न पूछता है, पर संबद्ध तथ्यों की परख अवश्य करता है (Bandyopadhyay Committee 2008, Saranda Action Plan 2011, IAP 2010)। साक्षात्कार बोर्ड इस विषय को पसंद करते हैं क्योंकि यह उम्मीदवारों को सूक्ष्मता दिखाने का अवसर देता है — केवल "सुरक्षा बनाम विकास" नहीं, बल्कि अधिकार-आधारित विकास (rights-based development) का पहलू।

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