Surrogacy (Regulation) Act 2021
Surrogacy (Regulation) Act 2021 · Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act 2021
कहानी से शुरुआत
अगस्त 2008। Anand, Gujarat के एक वातानुकूलित IVF क्लिनिक में एक ऑस्ट्रेलियाई दम्पत्ति Dr. Nayana Patel के सामने बैठा है। वे 8,000 किलोमीटर की यात्रा भारत के समुद्र-तटों या मंदिरों के लिए नहीं, बल्कि यहाँ की सरोगेट महिलाओं के लिए करके आए हैं — वे भारतीय महिलाएँ जो ₹2-4 लाख में उनके आनुवंशिक शिशु को नौ महीने तक अपने गर्भ में धारण करेंगी। 2008 में भारत "प्रजनन पर्यटन" (reproductive tourism) का वैश्विक केंद्र बन चुका था — 2012 तक इसका अनुमानित आकार US$ 2.3 बिलियन था (CII अनुमान)। विदेशी दम्पत्ति भारत आते थे क्योंकि यहाँ सरोगेसी अनियमित, सस्ती और कानूनी रूप से उदार थी।
फिर Baby Manji प्रकरण (2008) सामने आया। एक जापानी दम्पत्ति ने Anand के Akanksha Infertility Clinic के माध्यम से एक सरोगेट का अनुबंध किया। जब बच्ची Manji का जन्म हुआ तब तक वह दम्पत्ति तलाक ले चुके थे। जापान ने उसे नागरिकता देने से इनकार किया (जापानी कानून के तहत आनुवंशिक माँ का दावा संभव नहीं था)। भारत ने उसे पासपोर्ट देने से इनकार किया (कोई भारतीय माता-पिता नहीं थे)। Manji तीन महीने तक राज्यविहीन रही। सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप किया (Baby Manji Yamada v. UoI 2008); अंततः उसकी जापानी नानी ने उसे गोद लिया।
इस प्रकरण ने सब कुछ उजागर कर दिया: राज्यविहीनता का जोखिम, सरोगेट महिलाओं का शोषण (गरीब महिलाओं को विदेशी बच्चे ढोने के एवज में नाममात्र भुगतान, "सरोगेसी हॉस्टल" में बंद रखा जाना), प्रजनन का व्यापारीकरण, और सरोगेसी से जन्मे बच्चों की कानूनी स्थिति का अभाव। इसके बाद 228वीं विधि आयोग रिपोर्ट (2009) + ART विधेयकों के मसौदे (2010, 2013, 2014) + Surrogacy विधेयकों के मसौदे (2016, 2019) आए।
अंततः दिसम्बर 2021 में संसद ने दो समानांतर कानून पारित किए — Surrogacy (Regulation) Act 2021 + Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act 2021 — जो इस बहु-अरब रुपये के उद्योग को कड़े नियमन के अंतर्गत लाते हैं। दोनों कानून अपनी प्रतिबंधात्मक पात्रता शर्तों (केवल विवाहित जोड़े, आयु सीमाएँ, एकल महिलाओं पर रोक, LGBTQ+ का बहिष्करण) के चलते अब सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती का सामना कर रहे हैं (अनेक याचिकाएँ)। यह फ़ाइल इस समग्र व्यवस्था का विवरण प्रस्तुत करती है।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
Mains GS-I + GS-II का विषय — 2015 में पूछा गया था "भारत में अनाथ एवं परित्यक्त बच्चों की समस्या से उबरने के उपाय सुझाइए" और 2020 में "महिला सशक्तीकरण सुनिश्चित करने में महिला संगठनों की भूमिका पर चर्चा करें।" सरोगेसी बहस परिवार + विवाह इकाई का प्रिय विषय है और इसमें महिला सशक्तीकरण का पहलू भी जुड़ा है।
Prelims में ART + सरोगेसी सीधे परीक्षित हो चुके हैं: सरोगेट की पात्रता (eligibility), National + State ART Boards, परोपकारी (altruistic) बनाम व्यावसायिक (commercial) सरोगेसी का भेद। इन अधिनियमों की हालिया प्रकृति एवं चल रही SC चुनौतियों के मद्देनज़र प्रति वर्ष कम से कम एक प्रश्न की अपेक्षा रखें।
Interview: व्यापारीकरण की नैतिकता, सरोगेट के अधिकार, एकल माता-पिता की पात्रता, विवाह समानता + प्रजनन अधिकार।
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