Pokhran-I (Smiling Buddha) 1974
Pokhran-I (Smiling Buddha) 1974 · Pokhran-II (Shakti) 1998 · NSG response
कहानी से शुरुआत
समय है सुबह 8:05 बजे, 18 मई 1974, बुद्ध पूर्णिमा। पोखरण, राजस्थान की रेत के नीचे 107 मीटर ज़मीन के अंदर एक 8-किलोटन का प्लूटोनियम उपकरण फटता है। डॉ. राजा रमन्ना (Raja Ramanna), डॉ. होमी सेठना (Homi Sethna) (Chairman AEC), डॉ. पी.के. अय्यंगर (P.K. Iyengar) और डॉ. राजगोपाल चिदंबरम (Rajagopala Chidambaram) पोखरण रेंज पर सिस्मोग्राफ (seismograph) के इर्द-गिर्द जमा हैं। रेत का एक गुंबद (dome) बनकर ऊपर उठता है। डॉ. रमन्ना फ़ोन उठाते हैं और PM Indira Gandhi से कहते हैं: "Buddha is smiling." (बुद्ध मुस्कुरा रहे हैं।)
कुछ ही घंटों में पूरी दुनिया को Smiling Buddha यानी Pokhran-I, भारत के पहले परमाणु परीक्षण का पता चल जाता है। इंदिरा इसे एक "peaceful nuclear explosion" (PNE — शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट) कहती हैं। दुनिया इस बात से सहमत नहीं होती। कुछ ही हफ़्तों में Nuclear Suppliers Group (NSG) का जन्म होता है — 45 राष्ट्र (आज 48) जो परमाणु प्रौद्योगिकी के व्यापार को नियंत्रित करते हैं, और इसका गठन ख़ास तौर पर इसलिए हुआ क्योंकि भारत ने Canadian CIRUS reactor से प्राप्त प्लूटोनियम का हथियारीकरण किया (यह एक शांतिपूर्ण अनुसंधान रिएक्टर था जो Canada-India Reactor के तहत US safeguards के साथ चला)।
अब दृश्य बदलकर पहुँचता है 11 मई 1998, दोपहर 3:45 बजे, पोखरण। तीन उपकरण लगभग एक साथ फटते हैं: एक fission device (45 kt), एक thermonuclear device (दावे के अनुसार ~43 kt), और एक sub-kiloton fission। दो दिन बाद, 13 मई को, दो और sub-kiloton उपकरण फटते हैं। Operation Shakti — Pokhran-II — 72 घंटों में पाँच परीक्षण। PM Atal Bihari Vajpayee घोषणा करते हैं: "India is now a nuclear-weapons state." (भारत अब एक परमाणु- हथियार सम्पन्न राष्ट्र है।)
दुनिया भारत पर प्रतिबंध लगाती है — Glenn Amendment और Pressler Amendment लागू किए जाते हैं; US, Japan, Germany, Canada और EU सहायता रोक देते हैं। पाकिस्तान Chagai-I (28 मई 1998) और Chagai-II (30 मई) का परीक्षण करता है। मात्र 5 हफ़्तों में दक्षिण एशिया खुले तौर पर परमाणु-सम्पन्न हो जाता है।
दस साल बाद, 6 सितंबर 2008 को, NSG भारत को एक अनूठी छूट (waiver) देता है — अपनी तरह की पहली — जिसमें भारत के एकतरफ़ा परीक्षण रोक (testing moratorium) + सैन्य-असैन्य पृथक्करण योजना + IAEA-विशिष्ट safeguards को मान्यता दी जाती है। भारत NPT या CTBT पर हस्ताक्षर किए बिना ही परमाणु मुख्यधारा में प्रवेश कर जाता है। पोखरण का जोखिम अब पोखरण की वैधता बन चुका था।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
Prelims: तिथियाँ (18 मई 1974; 11/13 मई 1998; 6 सितंबर 2008), वैज्ञानिक (Ramanna, Sethna, Chidambaram, Kalam, Sarabhai का संस्थापक योगदान, Bhabha की विरासत), कोड नाम (Smiling Buddha, Shakti), NPT 1968, CTBT 1996, NSG 1974-75 की स्थापना, 123 Agreement 2008, Hyde Act 2006।
Mains GS-I/II/III: भारत का परमाणु सिद्धांत (No First Use); रणनीतिक स्वायत्तता बनाम अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था; CIRUS विवाद + प्रौद्योगिकी इनकार व्यवस्था (technology denial regime); निर्यात नियंत्रण; SAARC रणनीतिक संतुलन; Vajpayee की वृहद रणनीति।
Interview: क्या भारत को आज NPT पर हस्ताक्षर करने चाहिए? क्या Pokhran-I 24 वर्षों के अलगाव के लायक था? क्या No First Use 2024 तक टिक पाया है?
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