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भारत का भूगोलप्रारंभिक: उच्चमुख्य परीक्षा: उच्चसाक्षात्कार: मध्यम12 मिनट में पढ़ेंअपडेट किया गया 2026-06-02

Western & Eastern Ghats

Western & Eastern Ghats · Sahyadri · orographic rainfall · biodiversity hotspot · peninsular river sources

कहानी से शुरुआत

मानसून के मौसम में भारत के पश्चिमी तट पर खड़े होकर पूर्व की ओर देखिए — आपको मैदान से एकाएक ऊपर उठती हुई एक लगभग अटूट हरी दीवार दिखेगी — यही है Western Ghats, जिसे Sahyadri भी कहते हैं। जब अरब सागर से उठकर दक्षिण-पश्चिम मानसून इस ओर आता है, तो यह दीवार आर्द्र वायु को तेज़ी से ऊपर धकेलती है; वायु ठंडी होती है, संघनित (condense) होती है, और पश्चिमी ढलानों पर भारी वर्षा बरसाती है — Agumbe और Mahabaleshwar में प्रतिवर्ष 6,000 mm से भी अधिक। कुछ किलोमीटर पूर्व की ओर जाइए और आप Deccan के वृष्टि-छाया क्षेत्र (rain shadow) में पहुँच जाते हैं, जहाँ कुछ ज़िलों में मुश्किल से 600 mm वर्षा होती है। एक ही पर्वत श्रृंखला, दो बिल्कुल भिन्न संसार।

अब पूर्वी तट की यात्रा कीजिए। यहाँ Eastern Ghats कोई दीवार नहीं हैं — ये एक टूटी-फूटी, अपरदित (eroded) पहाड़ियों की श्रृंखला हैं, जिन्हें महान प्रायद्वीपीय नदियाँ — Mahanadi, Godavari, Krishna और Kaveri — बंगाल की खाड़ी की ओर बहते हुए बार-बार काटती हैं। दक्षिण में ये दोनों श्रृंखलाएँ Nilgiri Hills में मिलती हैं, जहाँ Doddabetta की गोलाई लिए नीले पहाड़ इस संगम को चिह्नित करते हैं।

ये दोनों श्रृंखलाएँ प्रायद्वीपीय भारत की कगार हैं — ये तय करती हैं कि वर्षा कहाँ होगी, महान नदियाँ कहाँ से उठेंगी, और पृथ्वी की सबसे समृद्ध जैव-विविधता (biodiversity) कहाँ जीवित रहेगी। अकेले Western Ghats दुनिया के आठ "सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण" biodiversity hotspots में से एक हैं और UNESCO World Heritage Site भी हैं। Ghats को समझना यानी भारतीय प्रायद्वीप के कंकाल और प्राण-रस को समझना है।

UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह GS-I के भौतिक भूगोल का अत्यधिक महत्त्वपूर्ण विषय है, जो GS-III (पर्यावरण, आपदाएँ) से भी जुड़ता है। Prelims में दोनों श्रृंखलाओं के अंतरसर्वोच्च चोटियाँ (Anamudi, Doddabetta, Jindhagada), दर्रे/गैप (Palghat), orographic rainfall और rain shadow, तथा कौन-सी नदियाँ कहाँ से उठती हैं — से प्रश्न पूछे जाते हैं। Mains में इसे biodiversity संरक्षण (Gadgil बनाम Kasturirangan बहस), भूस्खलन (Wayanad 2024) और मानसून तंत्र के साथ जोड़ा जाता है। यह विषय अपवाह तंत्र, जलवायु और पारिस्थितिकी को एक सूत्र में पिरोता है।

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