Drainage
Drainage — Himalayan rivers · Peninsular rivers · river interlinking
कहानी से शुरुआत
मई 2002 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक साहसी घोषणा की: नदियों को आपस में जोड़ने (Interlinking of Rivers) की परियोजना — भारत की लगभग 4,500 नदियों को एक विशाल जल-संचार तंत्र में पिरोने का प्रस्ताव। इस विचार का आधार यह था कि जल-अधिशेष Brahmaputra और Ganga का पानी नलों के ज़रिए दक्षिण की ओर मोड़कर जल-कमी से जूझते Cauvery और Krishna को पुनर्जीवित किया जाए। अनुमानित लागत थी ₹5.6 लाख करोड़ (जो बाद में बढ़कर ₹11 लाख करोड़ से ऊपर हो गई)। प्रस्तावित नहरों का नक्शा भूगोल से कम और किसी विद्युत-परिपथ (electrical circuit) के आरेख से ज़्यादा मेल खाता था — 14 Himalayan और 16 peninsular, कुल 30 कड़ियाँ (links), 1,000 किलोमीटर की विविध भूमि को काटती हुईं।
दो दशक बाद, केवल एक कड़ी — Ken-Betwa — ने दिसंबर 2024 में वर्षों की कानूनी लड़ाइयों के बाद अंततः ज़मीन पर काम शुरू किया। इतनी देरी क्यों? क्योंकि नदियाँ पाइप नहीं हैं। वे जीवित पारिस्थितिक तंत्र हैं जो गाद (silt), मछलियाँ और राजनीतिक स्मृतियाँ अपने साथ बहाती हैं। Tamil Nadu और Karnataka 1892 से Madras Presidency और Princely State of Mysore के बीच हुए समझौते से लेकर आज तक Cauvery पर युद्ध-सी स्थिति में हैं। Indus Waters Treaty 1960 तीन युद्धों के बावजूद भारत-पाकिस्तान के बीच टिकी रही, किंतु अब दबाव में है। Brahmaputra, जो तिब्बत में Tsangpo कहलाती है, China द्वारा Medog में बाँधी जा रही है (दुनिया की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना, 60 GW नियोजित) — और भारत इस आशंका से ग्रस्त है कि जल को हथियार बनाया जा सकता है।
नदियों ने भारतीय सभ्यता को आकार दिया। हड़प्पावासी (Harappans) Indus और अब विलुप्त हो चुकी Saraswati के किनारे बसे थे। वैदिक संस्कृति (Vedic culture) Saraswati-Drishadvati के तट पर फैली। Magadh के साम्राज्य Ganga पर पले-बढ़े। Madurai ने Vaigai के किनारे समृद्धि पाई। आज का भारत अपने पेयजल का ~80% और सिंचाई का 86% इन्हीं नदी तंत्रों से जुड़े सतही और भूजल से प्राप्त करता है। अपवाह (drainage) को समझना खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, भू-राजनीति और प्राकृतिक आपदाओं की भूगर्भीय नींव को समझना है।
UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
Drainage से सम्बंधित प्रश्न प्रत्येक Prelims में तथ्यात्मक स्वरूप में (उद्गम, सहायक नदियाँ, बाँध, अधिकरण) और Mains के हर दो चक्रों में एक बार विश्लेषणात्मक रूप में (नदी-जोड़, अंतर-सीमावर्ती विवाद, हिमनद-पश्चापसरण, बाढ़) पूछे जाते हैं। 2023 Mains में trans-Himalayan नदियों पर प्रश्न आया था और 2024 Prelims में Cauvery बेसिन के राज्यों की जाँच की गई थी। प्रत्येक Prelims वर्ष में 1-2 प्रश्नों की अपेक्षा करें।
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