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कला एवं संस्कृतिप्रारंभिक: उच्चमुख्य परीक्षा: मध्यमसाक्षात्कार: मध्यम12 मिनट में पढ़ेंअपडेट किया गया 2026-06-01

Painting

Painting — Murals · miniatures · Rajput, Mughal, Pahari schools

कहानी से शुरुआत

समय है 1571 का। मुगल बादशाह Akbar, जो केवल अट्ठाईस वर्ष के हैं, ने अभी-अभी एशिया की सबसे बड़ी सचित्र पांडुलिपि का काम सौंपा है: संस्कृत Mahabharata का 14-खंडों वाला फ़ारसी-भाषा अनुवाद जिसे Razmnama (युद्ध की पुस्तक) कहा जाता है। इसे चित्रित करने के लिए वे सौ से अधिक चित्रकारों की एक कार्यशाला (tasvir-khana) बुलाते हैं — Tabriz से लाए गए Mir Sayyid Ali और Abd al-Samad के नेतृत्व में फ़ारसी-प्रशिक्षित उस्ताद, जो Daswanth और Basawan जैसे भारतीय कलाकारों के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। पंद्रह वर्षों में यह टीम महाकाव्य के दृश्यों को दर्शाती 169 लघुचित्र (miniature paintings) तैयार करती है। Razmnama की पहली प्रति Akbar के पुस्तकालय में गई; आगे की प्रतियाँ सामंतों को भेंट की गईं। हिंदू महाकाव्य, फ़ारसी में, मिश्रित इंडो-फ़ारसी हाथों से चित्रित — तीन सभ्यताएँ एक ही पुस्तक में मिलती हुईं।

यही था मुगल चित्रकला विद्यालय (Mughal school of painting) का जन्म — फ़ारसी safavid परिष्कार का भारतीय प्रतीकात्मक साक्षरता से विवाह। इसने एक श्रृंखला-प्रतिक्रिया छेड़ दी। राजस्थान के Rajput दरबारों (Mewar, Bundi, Bikaner, Kishangarh) ने अपनी प्रतिक्रिया विकसित की — मुगल-प्रभावित तकनीक में हिंदू भक्ति विषय। हिमाचल प्रदेश के Pahari पहाड़ी राज्यों (Basohli, Guler, Kangra) ने इस परंपरा को और आगे बढ़ाया, असाधारण गीतात्मकता वाले Krishna-bhakti परिदृश्यों में। तीन शताब्दियों (16वीं-19वीं) में भारत ने विश्व कला की सबसे महान लघुचित्र परंपराओं में से एक का सृजन किया।

परंतु भारतीय चित्रकला मुगलों से कहीं अधिक प्राचीन है। Ajanta के भित्तिचित्र (murals) (2nd c. BCE - 6th c. CE) इसका आधारभूत पर्वत हैं। Bagh गुफाएँ, Sittannavasal के Jain भित्तिचित्र, Lepakshi के Vijayanagar चित्र — ये सभी भित्तिचित्र परंपरा में दीवार-चित्र (wall paintings) हैं। दीवार (mural) से पृष्ठ (miniature) की ओर बदलाव लगभग 11वीं-12वीं c. CE में होता है, जब Jain pothis (ताड़-पत्र पांडुलिपियाँ) और Buddhist Pala manuscripts पृष्ठ-चित्रण परंपरा आरंभ करती हैं जिसे मुगल औद्योगिक स्तर पर ले जाएँगे। भित्तिचित्र और लघुचित्र भारतीय चित्रकला की दो स्थापत्य-शैलियाँ हैं।

UPSC के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

भारतीय चित्रकला Prelims में अधिकांश वर्षों में आती है — Mughal-Rajput- Pahari विद्यालय पहचान, लघुचित्रकार आरोपण (attribution), भित्तिचित्र-स्थल तिथि-निर्धारण। Mains इसका उपयोग "इंडो-फ़ारसी संश्लेषण," "कला में भक्ति अभिव्यक्ति," या "भारतीय चित्रकला परंपराओं के विकास" के लिए करता है। Interview बोर्ड इसे सांस्कृतिक कूटनीति (विदेशी संग्रहालयों में मुगल पांडुलिपियाँ) और "भारतीय" कला को परिभाषित करने के प्रश्न के लिए जाँचते हैं।

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